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Pauri News: कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रदान किए प्रमाण पत्र
Fri, 31 Oct 2025 05:39 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 31 Oct 2025 05:39 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में आयोजित पांच दिवसीय मनोसामाजिक सहायता प्रशिक्षण कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखंड की ओर से भारत सरकार एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित कार्यशाला के समापन पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशुतोष सयाना ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
प्रो. सयाना ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में मिनट्स पिरामिड का विशेष महत्व है, जिसमें चार स्तर ज्ञान, कैसे करना, दिखाना और वास्तव में करना होता है। उन्होंने कहा कि पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में डॉक्टरों और काउंसलरों ने जो अनुभव और ज्ञान प्राप्त किया है, वह भविष्य में उनके कार्यक्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
निमहांस बेंगलुरु से आए विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार मणिकप्पा, डॉ. के. शेखर और डॉ. अनिल ने आपदा के दौरान एवं बाद में पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों और उनके समाधान के व्यावहारिक तरीके सिखाए। डॉ. संजीव ने प्रशिक्षणार्थियों को जोखिम विश्लेषण, तनाव की पहचान, मनोसामाजिक देखभाल, पारिवारिक जीवन चक्र, महिलाओं एवं बच्चों पर आपदा के प्रभाव जैसे 52 बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया।
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श्रीनगर। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में आयोजित पांच दिवसीय मनोसामाजिक सहायता प्रशिक्षण कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखंड की ओर से भारत सरकार एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित कार्यशाला के समापन पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशुतोष सयाना ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
प्रो. सयाना ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में मिनट्स पिरामिड का विशेष महत्व है, जिसमें चार स्तर ज्ञान, कैसे करना, दिखाना और वास्तव में करना होता है। उन्होंने कहा कि पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में डॉक्टरों और काउंसलरों ने जो अनुभव और ज्ञान प्राप्त किया है, वह भविष्य में उनके कार्यक्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
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निमहांस बेंगलुरु से आए विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार मणिकप्पा, डॉ. के. शेखर और डॉ. अनिल ने आपदा के दौरान एवं बाद में पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों और उनके समाधान के व्यावहारिक तरीके सिखाए। डॉ. संजीव ने प्रशिक्षणार्थियों को जोखिम विश्लेषण, तनाव की पहचान, मनोसामाजिक देखभाल, पारिवारिक जीवन चक्र, महिलाओं एवं बच्चों पर आपदा के प्रभाव जैसे 52 बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया।
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