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भारतीय सेना के अंग बने 236 रिक्रूट
Pauri
Updated Sun, 05 Jan 2014 05:46 AM IST
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लैंसडौन। गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के 236 रिक्रूट शनिवार को भारतीय सेना के अभिन्न अंग बन गए। पुनरीक्षक अधिकारी कर्नल अमित कबटियाल कमांडिंग आफीसर 20वीं गढ़वाल (सेना मेडल) ने रिक्रूटों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उसके साथ ही रिक्रूटों ने अपने दाहिने कंधे पर रॉयल रस्सी धारण की।
गढ़वाल राइफल्स के परेड मैदान में आयोजित कसम परेड में शनिवार को 34 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद 236 रिक्रूट गढ़वाल रेजीमेंटल की आन-बान-शान और मर्यादाओं की उच्च परंपराओं को अक्षुण्ण रखने की कसम खाते हुए भारतीय सेना में जुड़ गए। रिक्रूटों को संबोधित करते हुए पुनरीक्षक अधिकारी कबटियाल ने कहा कि गढ़वाल राइफल्स की शौर्य गाथा इतिहास के पृष्ठाें पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। रेजीमेंट के सैनिकों की वीरता की शानदार परंपरा रही है। विश्व में रेजीमेंट के सैनिक अदम्य साहस और शौर्य परंपरा के लिए सर्वश्रेष्ठ सैनिकों की फेहरिस्त में गिने जाते हैं। उन्होेंने सेना का अंग बने नए सैनिकों से अपेक्षा की कि वह देश सेवा, कर्तव्य निष्ठ और अनुशासन के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए देश और सेना के लिए कार्य करें।
कर्नल कबटियाल ने रिक्रूटों की परेड का निरीक्षण किया। कबटियाल के साथ डिप्टी कमांडेंट ले. कर्नल हिम्मत सिंह ढिल्लन, जीएसओ वन मेजर मंदार जोगलेकर ने परेड की सलामी ली। इस दौरान उन्होंने पूर्व में शहीद सैनिकों की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों का भावपूर्ण स्मरण किया।
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इस दौरान नवनियुक्त सैनिकाें ने शानदार परेड का प्रदर्शन किया। परेड का नेतृत्व कमांडर मोहन सिंह ने किया। परेड की टुकड़ियाें की अगुवाई संदीप नेगी, आशीष, संदी सिंह, दीपक सिंह कर रहे थे। परेड देखने के लिए सैकड़ों दर्शक मौजूद थे।
कसम परेड में बर्फ का भी आनंद
- रिक्रूटों को सेना का अभिन्न अंग बनाने के लिए आयोजित कसम परेड के दौरान हल्की बर्फबारी भी शुरू हो गई। करीब पांच मिनट तक बर्फ पड़ती रही जिससे परेड मैदान पूरी तरह से सफेद हो गया। हालांकि कुछ मिनट बाद ही बर्फ पिघल गई, लेकिन इस नजारे का सैनिकों सहित वहां आए दर्शकों ने भी खूब आनंद लिया।
इनको मिला सम्मान
ओवरआल परफारमेंस के लिए विनीत शर्मा को रजत पदक, सर्वश्रेष्ठ फायरिंग के लिए रविंद्र सिंह, सर्वोत्तम ड्रिल के लिए मोहन सिंह और संदीप सिंह को पदक दिए गए। कोर कमांडर नायक हरेंद्र सिंह, प्लाटून कमांडर सुबेदार बलदेव सिंह को सर्वश्रेष्ठ ट्रेनिंग के लिए प्रशस्तिपत्र प्रदान किए गए।
परिजन भी किए सम्मानित
- इस बार पहला मौका था जब सेना मेें शामिल होने वाले रिक्रू टों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया। उनको पदक दिए गए।
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गढ़वाल राइफल्स के परेड मैदान में आयोजित कसम परेड में शनिवार को 34 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद 236 रिक्रूट गढ़वाल रेजीमेंटल की आन-बान-शान और मर्यादाओं की उच्च परंपराओं को अक्षुण्ण रखने की कसम खाते हुए भारतीय सेना में जुड़ गए। रिक्रूटों को संबोधित करते हुए पुनरीक्षक अधिकारी कबटियाल ने कहा कि गढ़वाल राइफल्स की शौर्य गाथा इतिहास के पृष्ठाें पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। रेजीमेंट के सैनिकों की वीरता की शानदार परंपरा रही है। विश्व में रेजीमेंट के सैनिक अदम्य साहस और शौर्य परंपरा के लिए सर्वश्रेष्ठ सैनिकों की फेहरिस्त में गिने जाते हैं। उन्होेंने सेना का अंग बने नए सैनिकों से अपेक्षा की कि वह देश सेवा, कर्तव्य निष्ठ और अनुशासन के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए देश और सेना के लिए कार्य करें।
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कर्नल कबटियाल ने रिक्रूटों की परेड का निरीक्षण किया। कबटियाल के साथ डिप्टी कमांडेंट ले. कर्नल हिम्मत सिंह ढिल्लन, जीएसओ वन मेजर मंदार जोगलेकर ने परेड की सलामी ली। इस दौरान उन्होंने पूर्व में शहीद सैनिकों की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों का भावपूर्ण स्मरण किया।
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इस दौरान नवनियुक्त सैनिकाें ने शानदार परेड का प्रदर्शन किया। परेड का नेतृत्व कमांडर मोहन सिंह ने किया। परेड की टुकड़ियाें की अगुवाई संदीप नेगी, आशीष, संदी सिंह, दीपक सिंह कर रहे थे। परेड देखने के लिए सैकड़ों दर्शक मौजूद थे।
कसम परेड में बर्फ का भी आनंद
- रिक्रूटों को सेना का अभिन्न अंग बनाने के लिए आयोजित कसम परेड के दौरान हल्की बर्फबारी भी शुरू हो गई। करीब पांच मिनट तक बर्फ पड़ती रही जिससे परेड मैदान पूरी तरह से सफेद हो गया। हालांकि कुछ मिनट बाद ही बर्फ पिघल गई, लेकिन इस नजारे का सैनिकों सहित वहां आए दर्शकों ने भी खूब आनंद लिया।
इनको मिला सम्मान
ओवरआल परफारमेंस के लिए विनीत शर्मा को रजत पदक, सर्वश्रेष्ठ फायरिंग के लिए रविंद्र सिंह, सर्वोत्तम ड्रिल के लिए मोहन सिंह और संदीप सिंह को पदक दिए गए। कोर कमांडर नायक हरेंद्र सिंह, प्लाटून कमांडर सुबेदार बलदेव सिंह को सर्वश्रेष्ठ ट्रेनिंग के लिए प्रशस्तिपत्र प्रदान किए गए।
परिजन भी किए सम्मानित
- इस बार पहला मौका था जब सेना मेें शामिल होने वाले रिक्रू टों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया। उनको पदक दिए गए।