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पशु अस्पतालों में डाक्टरों का टोटा
Pauri
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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कोटद्वार। पशु अस्पतालों में चिकित्सकों के पद खाली होने से पशु पालकों को निजी अस्पतालों अथवा नीम हकीमों का सहारा लेना पड़ रहा है। इन दिनों जनपद में 10 चिकित्सालयों में चिकित्सकों का पद खाली पड़े हुएए हैं।
जनपद के पौड़ी, दुगड्डा और कांडाखाल में पशु चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है। दुगड्डा के पशु अस्पताल में तो लगभग दो माह से कोई चिकित्सक नहीं है। इससे पशु पालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कांडाखाल पशु अस्पताल में भी चिकित्सक के नहीं होने से पशुपालकों को प्राइवेट अस्पतालों में पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। इन दिनों दुगड्डा के पशु चिकित्सालय की जिम्मेदारी कोटद्वार के पशु चिकित्साधिकारी के पास है।
क्या है लोगों का कहना
दुगड्डा क्षेत्र के रघुनाथ पशु अस्पताल में जब चिकित्सक ही नहीं, तो उन्हें बाजार से दवा लेकर जानवर को खिलानी पड़ती है। वहीं परमानंद का कहना है कि वे तो कई बार अस्पताल गया, लेकिन डाक्टर नहीं मिले। बताया गया कि डाक्टर साहब का प्रमोशन हो गया है। जब नए डाक्टर आएंगे, तो ही इलाज होगा।
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-जनपद के जिन पशु अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं। उनकी व्यवस्था के लिए शासन से कहा गया है। अभी हाल में चार नए चिकित्सक आए हैं। बाकी 10 चिकित्सकों की व्यवस्था की जा रही है। जहां पर चिकित्सक नहीं हैं। वहां पर नजदीकी चिकित्साधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
-डा. संदीप रावत, सीवीओ, पौड़ी
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जनपद के पौड़ी, दुगड्डा और कांडाखाल में पशु चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है। दुगड्डा के पशु अस्पताल में तो लगभग दो माह से कोई चिकित्सक नहीं है। इससे पशु पालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कांडाखाल पशु अस्पताल में भी चिकित्सक के नहीं होने से पशुपालकों को प्राइवेट अस्पतालों में पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। इन दिनों दुगड्डा के पशु चिकित्सालय की जिम्मेदारी कोटद्वार के पशु चिकित्साधिकारी के पास है।
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क्या है लोगों का कहना
दुगड्डा क्षेत्र के रघुनाथ पशु अस्पताल में जब चिकित्सक ही नहीं, तो उन्हें बाजार से दवा लेकर जानवर को खिलानी पड़ती है। वहीं परमानंद का कहना है कि वे तो कई बार अस्पताल गया, लेकिन डाक्टर नहीं मिले। बताया गया कि डाक्टर साहब का प्रमोशन हो गया है। जब नए डाक्टर आएंगे, तो ही इलाज होगा।
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-जनपद के जिन पशु अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं। उनकी व्यवस्था के लिए शासन से कहा गया है। अभी हाल में चार नए चिकित्सक आए हैं। बाकी 10 चिकित्सकों की व्यवस्था की जा रही है। जहां पर चिकित्सक नहीं हैं। वहां पर नजदीकी चिकित्साधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
-डा. संदीप रावत, सीवीओ, पौड़ी