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वेदमंत्र अनेक बीमारियों को दूर करने में होते है सहायक
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देवप्रयाग। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में वेद विभाग की ओर से दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे विद्वानों ने 24 से अधिक शोधपत्रों का वाचन किया। विद्वानों ने वेदों व धर्मग्रंथों का वैज्ञानिक महत्व समझाते हुए कहा कि वेदमंत्र अनेक बीमारियों को दूर करने में महत्वपूर्ण होते है।
मंगलवार को लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नई दिल्ली के पौरोहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. रामराज उपाध्याय ने दो दिवसीय गोष्ठी का शुभारंभ किया। इस मौके पर विद्वानों ने शोधपत्रों का वाचन करते हुए कहा कि अगर वेदमंत्रों का उच्चारण शुद्ध हो और उसके प्रति सच्ची श्रद्धा रखी जाय तो वेदमंत्र अनेक बीमारियों को दूर करने में मददगार साबित होते है। साथ ही मनुष्य वेदमंत्रों के माध्यम से अनेक समस्याओं से छुटकारा भी पा सकता है। वैज्ञानिक भी वेदमंत्रों की अपार शक्ति, संचार व इच्छा शक्ति का परीक्षण कर रहे है। इसलिए हमें वेदों की इस अमूल्य संपत्ति का सद्पयोग करना चाहिए। संगोष्ठी के पहले दिन हिमाचल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से पहुंचे विद्वानों ने 24 से अधिक शोधपत्रों का वाचन किया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. केबी सुब्बरायडु ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी से शोधार्थियों के साथ ही संस्थान के छात्रों को भी लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डा. रामानुज उपाध्याय व धर्मानंद राउत थे। जबकि संगोष्ठी में संयोजक डा. शैलेंद्र उनियाल, प्रो. बनमाली विश्वाल, डा. आर बालमुरगन, डा. मुकेश कुमार, डा. अरविंद गौर, डा. वीरेंद्र बत्र्वाल व डा. नितेश द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
मंगलवार को लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नई दिल्ली के पौरोहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. रामराज उपाध्याय ने दो दिवसीय गोष्ठी का शुभारंभ किया। इस मौके पर विद्वानों ने शोधपत्रों का वाचन करते हुए कहा कि अगर वेदमंत्रों का उच्चारण शुद्ध हो और उसके प्रति सच्ची श्रद्धा रखी जाय तो वेदमंत्र अनेक बीमारियों को दूर करने में मददगार साबित होते है। साथ ही मनुष्य वेदमंत्रों के माध्यम से अनेक समस्याओं से छुटकारा भी पा सकता है। वैज्ञानिक भी वेदमंत्रों की अपार शक्ति, संचार व इच्छा शक्ति का परीक्षण कर रहे है। इसलिए हमें वेदों की इस अमूल्य संपत्ति का सद्पयोग करना चाहिए। संगोष्ठी के पहले दिन हिमाचल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से पहुंचे विद्वानों ने 24 से अधिक शोधपत्रों का वाचन किया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. केबी सुब्बरायडु ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी से शोधार्थियों के साथ ही संस्थान के छात्रों को भी लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डा. रामानुज उपाध्याय व धर्मानंद राउत थे। जबकि संगोष्ठी में संयोजक डा. शैलेंद्र उनियाल, प्रो. बनमाली विश्वाल, डा. आर बालमुरगन, डा. मुकेश कुमार, डा. अरविंद गौर, डा. वीरेंद्र बत्र्वाल व डा. नितेश द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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