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जांच के कटघरे में जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:02 PM IST
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पौड़ी। जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में जांच का सिलसिला नया नहीं है, बल्कि कालेज में अब हुई जांचों में भी प्राचार्य, रजिस्ट्रार व प्रोफेसर की नियुक्तियों में गड़बड़िया सामने आई हैं। कालेज एक बार फिर जांच की गिरफ्त में है और जांच के आदेशों के बाद यहां हड़कंप मचा हुआ है।
वर्ष 1991 में इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी की स्थापना हुई, लेकिन राज्य बनने के बाद यह विवादों में है। शासन स्तर पर कालेज की लगातार शिकायतों के बाद सतर्कता निदेशालय देहरादून के सचिव सुुरेंद्र कुमार भगत को मामले की जांच सौंपी गई। जांच में उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य डा. एमएम देवल, कुलसचिव जीके अवस्थी, बायोटेक्नॉलाजी में प्रो. नकली सिंह व रजिस्ट्रार संदीप कुमार की नियुक्ति को अनियमित करार दिया। इस पर कार्रवाई भी हुई। सचिव सतर्कता की जांच के साथ ही तत्कालीन अपर सचिव उच्च शिक्षा अरुण कुमार ढौंडियाल ने मामलों की जांच की और कालेज में अनियमितताओं पर रिपोर्ट भी शासन को सौंपी।
वर्ष 2007 से 2013 तक इन जांचों के बाद एक बार फिर कालेज जांच के दायरे में है। इस बार यूकेडी व क्षेत्रीय क्रांति मोर्चा ने आमरण अनशन के बाद कालेज में जांचें एक बार फिर शुरू हुई हैं। कालेज की एसआईटी जांच, रजिस्ट्रार की नियुक्ति एवं प्रमाण पत्रों की जांच, कालेज में खरीदारी की जांच समेत अन्य वित्तीय मामलों की जांच को लेकर डीएम ने सख्त तेवर अपनाए हैं। बहरहाल जांच संबंधी आदेश के बाद इंजीनियरिंग कालेज में हड़कंप मचा हुआ है और अब देखना यह है कि इस जांच में क्या कुछ निकल कर बाहर आता है।
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कोट
इंजीनियरिंग कालेज में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाना बेहद दुखद है। इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। जांच में मामला सामने आते ही सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा ईपीएफ में गड़बड़ी की जांच सहायक आयुक्त सामान्य भविष्य निधि देहरादून द्वारा की जाएगी।
-सुशील कुमार, जिलाधिकारी गढ़वाल।
कोट
कालेज में जांच के लिए डीएम समक्ष हैं और उनके द्वारा कार्रवाई भी शुरू की गई है। कालेज को इससे कोई एतराज नहीं है। कालेज में यदि अनियमितताएं होंगी तो खुलकर सामने भी आएंगी।
-डा. सत्य प्रकाश पांडे, निदेशक जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज, घुड़दौड़ी।
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वर्ष 1991 में इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी की स्थापना हुई, लेकिन राज्य बनने के बाद यह विवादों में है। शासन स्तर पर कालेज की लगातार शिकायतों के बाद सतर्कता निदेशालय देहरादून के सचिव सुुरेंद्र कुमार भगत को मामले की जांच सौंपी गई। जांच में उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य डा. एमएम देवल, कुलसचिव जीके अवस्थी, बायोटेक्नॉलाजी में प्रो. नकली सिंह व रजिस्ट्रार संदीप कुमार की नियुक्ति को अनियमित करार दिया। इस पर कार्रवाई भी हुई। सचिव सतर्कता की जांच के साथ ही तत्कालीन अपर सचिव उच्च शिक्षा अरुण कुमार ढौंडियाल ने मामलों की जांच की और कालेज में अनियमितताओं पर रिपोर्ट भी शासन को सौंपी।
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वर्ष 2007 से 2013 तक इन जांचों के बाद एक बार फिर कालेज जांच के दायरे में है। इस बार यूकेडी व क्षेत्रीय क्रांति मोर्चा ने आमरण अनशन के बाद कालेज में जांचें एक बार फिर शुरू हुई हैं। कालेज की एसआईटी जांच, रजिस्ट्रार की नियुक्ति एवं प्रमाण पत्रों की जांच, कालेज में खरीदारी की जांच समेत अन्य वित्तीय मामलों की जांच को लेकर डीएम ने सख्त तेवर अपनाए हैं। बहरहाल जांच संबंधी आदेश के बाद इंजीनियरिंग कालेज में हड़कंप मचा हुआ है और अब देखना यह है कि इस जांच में क्या कुछ निकल कर बाहर आता है।
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इंजीनियरिंग कालेज में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाना बेहद दुखद है। इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। जांच में मामला सामने आते ही सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा ईपीएफ में गड़बड़ी की जांच सहायक आयुक्त सामान्य भविष्य निधि देहरादून द्वारा की जाएगी।
-सुशील कुमार, जिलाधिकारी गढ़वाल।
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कालेज में जांच के लिए डीएम समक्ष हैं और उनके द्वारा कार्रवाई भी शुरू की गई है। कालेज को इससे कोई एतराज नहीं है। कालेज में यदि अनियमितताएं होंगी तो खुलकर सामने भी आएंगी।
-डा. सत्य प्रकाश पांडे, निदेशक जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज, घुड़दौड़ी।