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एम्ब्रयो ट्रासफर टेक्निक से सुधरेगी दुधारू पशुओं की नश्ल
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:29 PM IST
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पौड़ी। आने वाले समय में उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में पशुओं में भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक (एम्ब्रयो ट्रांसफर टेक्निक) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे निम्न नस्ल के मादा दुधारू पशुओं में भी उच्च गुणवत्ता वाला भ्रूण प्रयोग किया जा सकेगा। पशु चिकित्सा विभाग इस तकनीक का सबसे पहले प्रयोग फील्ड स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तरकाशी जिले के बड़कोट पशु चिकित्सा अस्पताल में करने जा रहा है। शुरुआत में इस तकनीक का इस्तेमाल गायों की नस्ल सुधारने के लिए किया जा रहा है।
दरअसल अभी तक पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए मादा पशु के गर्भाश्य में उच्च गुणवत्ता वाले नर पशु का वीर्य डाला जाता था। इसके बाद भ्रूण तैयार होता था। इसमें कई बार परिणाम सही नहीं मिलते थे। अब पशु चिकित्सा विभाग ने मादा पशु के गर्भाश्य में उच्च गुणवत्ता का भ्रूण प्रत्यारोपित करने का निर्णय लिया है। इसे भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक नाम दिया गया है। इस तकनीक में उच्च गुणवत्ता वाले नर पशु का कम वीर्य इस्तेमाल कर ज्यादा भ्रूण तैयार किए जाएंगे। इससे एक साथ 10 गायों में यह भ्रूण प्रत्यारोपित किए जा सकेंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पशु चिकित्सा विभाग इस तकनीक को बड़कोट स्थित पशु चिकित्सा अस्पताल में शुरू करने जा रहा है। उत्तराखंड पशुधन विकास परिषद् की ओर से बड़कोट पशु चिकित्सा विभाग को रेड सिंधी नस्ल की गाय के 10 भ्रूण मिले हैं। इसके लिए कुछ समय पहले डा. पारुल रावत और डा. अनमोल नौटियाल को विभाग ने प्रशिक्षण भी दिया है। बड़कोट क्षेत्र में पशु चिकित्सा विभाग ने लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस माह इस तकनीक पर काम शुरू हो जाएगा। पशु विशेषज्ञों की माने तों यह भ्रूण -196 डिग्री सेंटीग्रेड में तैयार किया जाता है। यह लिक्विड नाइट्रोजन फार्म में रहता है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित रहता है।
कोट-
अभी तक यह तकनीक कालसी परिक्षेत्र में ही इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन पहली बार विभाग इसे फील्ड लेवल पर शुरू करने जा रहा है। इसके लिए बड़कोट पशु चिकित्सालय का चयन किया गया है। इसके लिए दो पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित भी किया गया है। फिलहाल यह प्रक्रिया गायों में इस्तेमाल की जाएगी।
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-डा प्रलयंकर नाथ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी(उत्तरकाशी)
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दरअसल अभी तक पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए मादा पशु के गर्भाश्य में उच्च गुणवत्ता वाले नर पशु का वीर्य डाला जाता था। इसके बाद भ्रूण तैयार होता था। इसमें कई बार परिणाम सही नहीं मिलते थे। अब पशु चिकित्सा विभाग ने मादा पशु के गर्भाश्य में उच्च गुणवत्ता का भ्रूण प्रत्यारोपित करने का निर्णय लिया है। इसे भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक नाम दिया गया है। इस तकनीक में उच्च गुणवत्ता वाले नर पशु का कम वीर्य इस्तेमाल कर ज्यादा भ्रूण तैयार किए जाएंगे। इससे एक साथ 10 गायों में यह भ्रूण प्रत्यारोपित किए जा सकेंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पशु चिकित्सा विभाग इस तकनीक को बड़कोट स्थित पशु चिकित्सा अस्पताल में शुरू करने जा रहा है। उत्तराखंड पशुधन विकास परिषद् की ओर से बड़कोट पशु चिकित्सा विभाग को रेड सिंधी नस्ल की गाय के 10 भ्रूण मिले हैं। इसके लिए कुछ समय पहले डा. पारुल रावत और डा. अनमोल नौटियाल को विभाग ने प्रशिक्षण भी दिया है। बड़कोट क्षेत्र में पशु चिकित्सा विभाग ने लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस माह इस तकनीक पर काम शुरू हो जाएगा। पशु विशेषज्ञों की माने तों यह भ्रूण -196 डिग्री सेंटीग्रेड में तैयार किया जाता है। यह लिक्विड नाइट्रोजन फार्म में रहता है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित रहता है।
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अभी तक यह तकनीक कालसी परिक्षेत्र में ही इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन पहली बार विभाग इसे फील्ड लेवल पर शुरू करने जा रहा है। इसके लिए बड़कोट पशु चिकित्सालय का चयन किया गया है। इसके लिए दो पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित भी किया गया है। फिलहाल यह प्रक्रिया गायों में इस्तेमाल की जाएगी।
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-डा प्रलयंकर नाथ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी(उत्तरकाशी)