{"_id":"5c644033bdec22737e6b04a9","slug":"131550073907-pauri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिंगोली मल्ली में उद्यानिकरण से बदलेगी ग्रामीणों की आर्थिकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिंगोली मल्ली में उद्यानिकरण से बदलेगी ग्रामीणों की आर्थिकी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। विकासखंड कीर्तिनगर के रिंगोली मल्ली में उद्यान विभाग की ओर से करीब 470 सेब व कीवी की पौधों का रोपण करवाया गया है। जबकि खोंगचा व क्वीली आदि गांवों में भी एक हेक्टेयर भूमि पर उद्यानीकरण के लिए पेड़ पहुंच चुके है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में यह उद्यान ग्रामीणों की आर्थिकी का अच्छा जरिया बन सकता है।
मनरेगा उद्यान कार्यक्रम के तहत उद्यान विभाग की ओर से ग्रामीणों को सेब व कीवी की निशुल्क पौध उपलब्ध करवाई गई है। आछरीखुंट के उद्यान प्रभारी सुरेश रावत ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में ग्राम पंचायत मल्ली रिंगोली के मनमोहन सिंह, नरेंद्र सिंह, शोभा राम व रामेश्वर आदि को कीवी के 70 पेड़ उपलब्ध करवाए गए है। जबकि इसी गांव में 400 सेब की पौध भी ग्रामीणों को वितरित की गई है। बताया कि पेड़ों के लिए गड्डे खुदाई से लेकर रोपण का सभी कार्य मनरेगा के तहत करवाया जा रहा है। काश्तकारों को सभी कार्यों का मनरेगा के तहत भुगतान किया जा रहा है। उद्यान प्रभारी रावत ने बताया कि इसके बाद खोंगचार व क्वीली आदि गांवों में भी करीब एक हेक्टेयर भूमि पर सेब की पौधों का रोपण किया जाएगा, जिसके लिए पौध भी पहुंच चुकी है। कहा कि अगर काश्तकारों की ओर से रोपे गए पौधों की सही देखभाल की गई तो आने वाले समय में यह ग्रामीणों की आर्थिकी का अच्छा माध्यम बन सकता है। बताया कि क्षेत्र में कीवी उत्पादन के लिए अभी ट्रायल की जा रही है। अगर यह कार्यक्रम सफल हुआ ऊंचाई वाले क्षेत्र को कीवी पट्टी के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
मनरेगा उद्यान कार्यक्रम के तहत उद्यान विभाग की ओर से ग्रामीणों को सेब व कीवी की निशुल्क पौध उपलब्ध करवाई गई है। आछरीखुंट के उद्यान प्रभारी सुरेश रावत ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में ग्राम पंचायत मल्ली रिंगोली के मनमोहन सिंह, नरेंद्र सिंह, शोभा राम व रामेश्वर आदि को कीवी के 70 पेड़ उपलब्ध करवाए गए है। जबकि इसी गांव में 400 सेब की पौध भी ग्रामीणों को वितरित की गई है। बताया कि पेड़ों के लिए गड्डे खुदाई से लेकर रोपण का सभी कार्य मनरेगा के तहत करवाया जा रहा है। काश्तकारों को सभी कार्यों का मनरेगा के तहत भुगतान किया जा रहा है। उद्यान प्रभारी रावत ने बताया कि इसके बाद खोंगचार व क्वीली आदि गांवों में भी करीब एक हेक्टेयर भूमि पर सेब की पौधों का रोपण किया जाएगा, जिसके लिए पौध भी पहुंच चुकी है। कहा कि अगर काश्तकारों की ओर से रोपे गए पौधों की सही देखभाल की गई तो आने वाले समय में यह ग्रामीणों की आर्थिकी का अच्छा माध्यम बन सकता है। बताया कि क्षेत्र में कीवी उत्पादन के लिए अभी ट्रायल की जा रही है। अगर यह कार्यक्रम सफल हुआ ऊंचाई वाले क्षेत्र को कीवी पट्टी के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जाएगी।
विज्ञापन