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वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने पर भड़के वाहन-compat
Updated Wed, 06 Jun 2018 10:36 PM IST
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पौड़ी। पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने पर भड़के वाहन मालिकों और चालकों ने आठ जून को श्रीनगर, देहरादून, पाबौ, पैठाणी, सतपुली सहित सभी रूटों की सेवाएं एक दिन के लिए ठप रखने का एलान किया है। उत्तराखंड टैक्सी-मैक्सी पर्वतीय महासंघ के संरक्षक कोतवाल सिंह ने कहा कि स्पीड गवर्नर के नाम पर वाहन चालकों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
वाहन मालिकों एवं चालकों ने कहा कि स्पीड गवर्नर केवल नए वाहनों में लगाए जाने का शासनादेश है, लेकिन संभागीय परिवहन अधिकारी की ओर से इसे पुराने वाहनों में भी लगवाया जा रहा है। ऐसा न करने पर वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है। टाटा सूमो ऑनर्स समिति पौड़ी के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर वाहन मालिकों से आठ हजार रुपये लिए जा रहे हैं, जबकि इसकी असल कीमत 2500 से 3500 रुपये तक है। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों एवं चालकों का उत्पीड़न बंद न हुआ तो संगठन आंदोलन तेज करने को बाध्य होगा।
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क्या है स्पीड गवर्नर
स्पीड गवर्नर डिवाइस का वाहनों की गति को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वाहनों की गति को सीमित करने के लिए इस डिवाइस को वाहनों के इंजन के साथ लगाया जाता है। इस डिवाइस के लगने के बाद वाहन को तय गति से ज्यादा तेज नहीं चलाया जा सकता है।
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स्पीड गवर्नर नए वाहनों पर कंपनी से लगकर आएगा, जबकि पुराने सभी कमर्शिलय वाहनों पर इसे लगाया जाना है। केंद्र सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई है। इसे लगाए जाने के लिए विभिन्न नौ कंपनियों को अधिकृत किया गया है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के आधार पर इन कंपनियों की सूची वाहन स्वामियों को उपलब्ध करा दी गई है। वे इनमें से किसी से भी इसे लगवा सकते हैं।-दिनेश चंद्र पठोई, आरटीओ पौड़ी
वाहन मालिकों एवं चालकों ने कहा कि स्पीड गवर्नर केवल नए वाहनों में लगाए जाने का शासनादेश है, लेकिन संभागीय परिवहन अधिकारी की ओर से इसे पुराने वाहनों में भी लगवाया जा रहा है। ऐसा न करने पर वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है। टाटा सूमो ऑनर्स समिति पौड़ी के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर वाहन मालिकों से आठ हजार रुपये लिए जा रहे हैं, जबकि इसकी असल कीमत 2500 से 3500 रुपये तक है। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों एवं चालकों का उत्पीड़न बंद न हुआ तो संगठन आंदोलन तेज करने को बाध्य होगा।
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क्या है स्पीड गवर्नर
स्पीड गवर्नर डिवाइस का वाहनों की गति को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वाहनों की गति को सीमित करने के लिए इस डिवाइस को वाहनों के इंजन के साथ लगाया जाता है। इस डिवाइस के लगने के बाद वाहन को तय गति से ज्यादा तेज नहीं चलाया जा सकता है।
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स्पीड गवर्नर नए वाहनों पर कंपनी से लगकर आएगा, जबकि पुराने सभी कमर्शिलय वाहनों पर इसे लगाया जाना है। केंद्र सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई है। इसे लगाए जाने के लिए विभिन्न नौ कंपनियों को अधिकृत किया गया है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के आधार पर इन कंपनियों की सूची वाहन स्वामियों को उपलब्ध करा दी गई है। वे इनमें से किसी से भी इसे लगवा सकते हैं।-दिनेश चंद्र पठोई, आरटीओ पौड़ी