{"_id":"5b4cd9f34f1c1b51748b5427","slug":"111531763187-pauri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्यूंकालेश्वर मंदिर में जलाभिषेक को उमड़े श्रद्वालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्यूंकालेश्वर मंदिर में जलाभिषेक को उमड़े श्रद्वालु
Updated Mon, 16 Jul 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पौड़ी। मंडल मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित क्यूंकालेश्वर मंदिर में सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के लिए सुबह चार बजे से श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई थी। मंदिर में देर शाम तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। भव्य रूप से सजाए गए मंदिर में विशेष पूजा-अनुष्ठान का भी आयोजन किया गया।
किनास पर्वत की तलहटी पर स्थित यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान शिव पार्वती के साथ गुप्त रूप में निवास करते हैं। स्कंद पुराण में भी इसका वर्णन किया गया है। मान्यता है कि ताड़कासुर से पीड़ित होकर यमराज ने यहां आकर सौ साल तक शिव की तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। तब यमराज ने भगवान शंकर व माता पार्वती को यहां निवास करने व दोनों के चरणों में भक्ति का वर मांगा था। पुराणों में कहा गया है कि भगवान शिव कलयुग में गुप्त रूप धारण कर यहां भक्तों को दर्शन देंगे। जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंची भावना और अनीता मेहरा ने कहा कि वे हर साल यहां जलाभिषेक के लिए आती हैं। पौड़ी में इसके अलावा कंडोलिया देवता मंदिर एवं अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
विज्ञापन
किनास पर्वत की तलहटी पर स्थित यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान शिव पार्वती के साथ गुप्त रूप में निवास करते हैं। स्कंद पुराण में भी इसका वर्णन किया गया है। मान्यता है कि ताड़कासुर से पीड़ित होकर यमराज ने यहां आकर सौ साल तक शिव की तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। तब यमराज ने भगवान शंकर व माता पार्वती को यहां निवास करने व दोनों के चरणों में भक्ति का वर मांगा था। पुराणों में कहा गया है कि भगवान शिव कलयुग में गुप्त रूप धारण कर यहां भक्तों को दर्शन देंगे। जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंची भावना और अनीता मेहरा ने कहा कि वे हर साल यहां जलाभिषेक के लिए आती हैं। पौड़ी में इसके अलावा कंडोलिया देवता मंदिर एवं अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
विज्ञापन