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भूकंप को लेकर भी कोई तैयारी नहीं

Wed, 17 Jul 2013 08:34 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Wed, 17 Jul 2013 08:34 AM IST
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no arrangement ?for earthquake

16-17 जून को आई आपदा की तरह ही भूकंप के रूप में सामने आने वाली आपदा से निपटने के लिए भी सरकारी तंत्र पूरी तरह से तैयार नही है।

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यह तब है जबकि प्रदेश के चार जिले पूरी तरह से और पांच और जिले आंशिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील जोन में हैं। तमाम आपदाओं को झेलने के बाद भी अभी तक प्रदेश में आपदाओं की तीव्रता और फ्रीक्वेंसी चिन्हित नहीं की गई है।
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16-17 जून को केदार और बदरीनाथ की घाटियों में मची तबाही से यह साफ हो गया था कि आपदा प्रबंधन प्रदेश में पटरी से उतरा हुआ है। यही हाल भूकंप को लेकर भी है। भूकंप को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से किए गए अध्ययन के मुताबिक करीब 1109 भवन ऐसे हैं जो भूकंप का झटका सहने में भी सक्षम नहीं है।
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पहले से ही बुरी हालत
मुसीबत यह है कि केदार और बदरीनाथ की घाटियों में भारी बरसात के कारण पहले से ही बुरी हालत है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के मुताबिक 16-17 जून को आई आपदा के कारण केदार से लेकर सोनप्रयाग के बीच में ही 192 नए भूस्खलन क्षेत्र विकसित हो गए हैं।

यही हाल बदरीनाथ से लेकर रुद्रप्रयाग तक की स्थिति है। ऐसे में कोई भी भूकंप इन क्षेत्रों में भारी तबाही का कारण बन सकता है। कुछ दिन पहले ही भूकंप का हल्का झटका रुद्रप्रयाग जिले में महसूस किया गया था और इस झटके ने ही लोगों की नींद उड़ा दी थी।


दूसरी ओर तैयारी का आलम यह है रिस्पांस टाइम अब भी पटरी पर नहीं आ पाया है। कैग की अप्रैल 2013 की रिपोर्ट के मुताबिक आपदा के बाद सरकारी मशीनरी की ओर से प्रतिक्रिया होने मे तीन से लेकर आठ घंटे तक का विलंब है।

मॉक ड्रिल भी सिर्फ चमोली तक
भूकंप के बाद की आपदा नियंत्रण की स्थिति को जानने के लिए की जाने वाली मॉक ड्रिल भी सिर्फ चमोली तक ही सीमित होकर रह गई है। इस बार ता यह मॉक ड्रिल भी नही हुई। नैनीताल, बागेश्वर, मसूरी के लिए भूकंप की दृष्टि से तैयार की गई रिपोर्ट भी फिलहाल ठंडे बस्ते में है। इस रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल कोई तैयारी नहीं की गई है। अति संवेदनशील हो गए 280 गांवों पर अब खतरा और बढ़ गया है।

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