फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   nanda raj jat yatra facing problem

पहले पड़ाव की राह भी जोखिम भरी

Wed, 07 Aug 2013 02:14 PM IST
रमेश चंद्र जोशी
रमेश चंद्र जोशी Updated Wed, 07 Aug 2013 02:14 PM IST
विज्ञापन
nanda raj jat yatra facing problem

मां नंदा के ससुराल के पहले पड़ाव कुलसारी पहुंचने की राह भी जोखिम भरी है। पूरा रास्ता भूस्खलन की चपेट में आ चुका है। राजजात में अमावस्या के दिन जब मां नंदा यहां पहुंचेगी तो उसे आपदा से पीड़ित ससुरालियों के मायूस चेहरे दिखेंगे। बहू का स्वागत तो होगा, लेकिन सिर्फ परंपराओं के निर्वहन तक।

विज्ञापन


पिंडरघाटी में मां नंदा के शक्तिपीठ के रुप में प्रसिद्ध कुलसारी मंदिर भी आपदा की जद में है। जबकि शिवाणी पिंडर नदी में समा चुका है, यहां राजजात के समय क्षेत्रों से आई छंतोलियां जुटती थी। तैयारियों के नाम पर यहां एक भी काम शुरू नहीं हुआ है।
विज्ञापन


समुद्रतल से करीब 1060 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सिद्धपीठ कुलसारी कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग पर स्थित है। यह मार्ग आपदा के बाद से अवरुद्ध है। गांवों के संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं, जिससे देवी भक्तों को कुलसारी तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। पंती, बैनोली, मींग, हरमनी सहित अन्य क्षेत्र भी आपदा से व्यापक रुप से प्रभावित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


शक्तिपीठ के रुप में होती है पूजा
कुलसारी में मां नंदा की पूजा अमावस्या की रात को होती है। मान्यता है कि यहां भूमिगत काली यंत्र है, जिसकी विशेष पूजा होती है। यहां जागरण के साथ देवी के दक्षिण काली रुप की रातभर पूजा होती है। यहां मां नंदा का प्राचीन मंदिर है। साथ ही दक्षिण काली, त्रिमुखी, लक्ष्मी, नारायण, हनुमान और सूर्य भगवान के भी मंदिर हैं। मंदिर के बाहरी क्षेत्र में लक्ष्मी जी की चरणपादुका भी हैं।

यूं पड़ा कुलसारी नाम
मां भगवती की कालसार रुप में काली पूजा करने पर क्षेत्र का नाम कुलसारी पड़ा। देवी की पूजा करने वाले पुजारी को कुसारा ब्राह्मण कहा गया। यहां हर वर्ष भादो माह की अमावस्या के दिन विशेष पूजा होती है।

कई छंतोलिया होती हैं शामिल
राजजात में मां नंदा जब भगोती से ससुराल के लिए के विदा होती है तो इस दौरान चांदपुर और श्रीगुरु पट्टी के गांवों से भी छंतोलियां शामिल होती है। देवी के ससुराल क्षेत्र में प्रवेश करते ही यात्रा के संचालन में क्षेत्र के थोकदार विशेष सहयोग देते हैं।

पोल गाढ़ने तक सीमित काम
राजजात तैयारियों के नाम पर कुलसारी के लिए 18 कार्यो का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा गया था, लेकिन चार ही स्वीकृत हुए। ऊर्जा निगम ने यहां कुछ विद्युत पोल गाढ़े हैं, जबकि जल संस्थान की चार लाख की योजना भी स्रोत से आगे नहीं बढ़ पाई है। दोनों संपर्क मार्ग भी नहीं बन पाए हैं। जबकि बाजार में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।


इनका कहना है
राजजात को प्रतीकात्मक रुप में मनाया जाएगा। लोग आपदा से पहले से प्रभावित है। ऐसे में भव्य आयोजन संभव नहीं है। हम इस बार सिर्फ परंपराओं का निर्वहन करेंगे। हमारी स्थिति 40 से अधिक लोगों की व्यवस्था तक ही सीमित है।
- गंगाराम सती, अध्यक्ष कुलसारी राजजात पड़ाव

व्यवस्थाएं पूरी होती तो कमेटी भी सहयोग देती। लेकिन तैयारियों के नाम पर इस पड़ाव पर एक भी काम नहंीं हुआ है।
- खुशाल सिंह बिष्ट सदस्य राजजात मेला कमेटी कुलसारी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed