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एजेंसी के फेर में फंसा नमामि गंगे अभियान
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 10 Apr 2016 10:29 PM IST
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नमामि गंगे
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नमामि गंगे अभियान के लिए नोडल एजेंसी तय न हो पाने के कारण अभी तक 11 हजार करोड़ रुपये का बजट अटका हुआ है। राज्य सरकार ने पेयजल निगम से अभियान का एक्शन प्लान तैयार कर एनजीटी में दाखिल करवा दिया था, लेकिन केंद्र सरकार यह कार्य किसी केंद्रीय एजेंसी से कराना चाहती है।
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केंद्रीय एजेंसी नए सिरे से सर्वेक्षण कराकर एक्शन प्लान तैयार करेगी। नमामि गंगे के संबंध में सोमवार को दिल्ली में बैठक होगी। इसमें राज्य के अफसर भी रहेंगे। बैठक में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकता है।
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गंगा स्वच्छता को लेकर केंद्र और राज्य के बीच रार के चक्कर में एजेंसी तय नहीं हो पाई। एनजीटी के दिसंबर 2015 में आदेश के बाद राज्य सरकार ने पेयजल निगम को नोडल एजेंसी बनाकर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और बायो डायजेस्टर आदि के संबंध में एक्शन प्लान तैयार करवा दिया था, लेकिन इस पर केंद्र राजी नहीं है।
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गंगा स्वच्छता का बजट जारी होने में हो सकती है देर
पहले केंद्र ने राज्य को पीपीपी मोड पर काम कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन कोई निजी कंपनी नहीं आई। इस पर केंद्र ने पेयजल निगम को स्वीकारने के बजाय किसी केंद्रीय एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने को कहा।
इस संबंध में गैरसैंण में मिनी सचिवालय बना रही वेबकॉस का नाम सुझाया गया। केंद्र ने यह भी कहा कि केंद्रीय एजेंसी नए सिरे से गंगा बेसिन का सर्वेक्षण करेगी। इससे पेयजल निगम की सारी मेहनत पर पानी तो फिर ही रहा है, साथ ही गंगा स्वच्छता का पूरा बजट जारी होने में और देर हो सकती है।
हालांकि एनजीटी ने केंद्र को पांच सौ करोड़ जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन बात नोडल एजेंसी पर आकर फंस गई। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद इस दिशा में गतिविधियां फिर तेज हो गई हैं।