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पिछले हफ्ते बंपर बिक्री के बाद इस हफ्ते खाली हाथ लौटीं महिलाएं, अव्यवस्था से महिलाओं में नाराजगी
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भीमताल में महिलाओं ने पहाड़ी उत्पादों की बाजार लगाई लेकिन ब्रिकी न होने से मायूस दिखी। संवाद न्य?
- फोटो : BHIMTAL
भीमताल (नैनीताल)। पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से शुरू किया गया साप्ताहिक हाट बाजार इस हफ्ते रविवार की जगह सोमवार को लगा। हालांकि जहां पहले हफ्ते स्वयं सहायता समूहों के बनाए उत्पादों की जमकर बिक्री हुई थी वहीं इस हफ्ते ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। महिलाएं दिनभर खुले आसमान के नीचे बैठी रहीं। शाम करीब तीन बजे महिलाएं बिक्री न होने के चलते मायूस होकर लौट गईं।
मायूस महिलाओं ने अगले हफ्ते से बाजार में न आने की बात कही। मेहरागांव के संकल्प और उन्नति कृष्णा ग्राम संगठन अध्यक्ष सरस्वती रौतेला, भवानी मेहरा, मीना मेहरा और प्रीति मेहरा ने बताया कि उन्हें खुले आसमान के नीचे दुकानें सजानी पड़ीं। टेंट की व्यवस्था नहीं की गई थी। वहीं जंतवाल गांव के साहस समूह की अध्यक्ष दीपा देवी, लता जंतवाल, माधवी देवी, कुदसिया और सानिया ने बताया कि वे सुबह से हरी सब्जियों और अन्य उत्पादों को लेकर आईं थीं लेकिन उत्पादों के न बिकने से काफी निराश हैं। कहा कि दुकान लगाने के लिए उनके लिए टेंट की व्यवस्था नहीं की गई। साथ ही टेंट हाउस से आईं बैंचों का किराया भी उन्हें ही देना पड़ा। नाराज महिलाओं ने कहा कि वे भविष्य में शायद ही हाट बाजार में शामिल होंगी।
महिला समूहों की ओर से हाट बाजार लगाने की सूचना ब्लॉक कार्यालय की ओर से हमें नहीं दी गई थी। अचानक हाट बाजार लगने और जानकारी के अभाव में ब्रिकी नहीं हो पाई होगी। अगली बार महिलाओं को कैनोपी (छोटा टेंट) देकर हाट बाजार को बेहतर ढंग से लगाया जाएगा। - संगीता आर्या, सहायक परियोजना निदेशक, डीआरडीए
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मायूस महिलाओं ने अगले हफ्ते से बाजार में न आने की बात कही। मेहरागांव के संकल्प और उन्नति कृष्णा ग्राम संगठन अध्यक्ष सरस्वती रौतेला, भवानी मेहरा, मीना मेहरा और प्रीति मेहरा ने बताया कि उन्हें खुले आसमान के नीचे दुकानें सजानी पड़ीं। टेंट की व्यवस्था नहीं की गई थी। वहीं जंतवाल गांव के साहस समूह की अध्यक्ष दीपा देवी, लता जंतवाल, माधवी देवी, कुदसिया और सानिया ने बताया कि वे सुबह से हरी सब्जियों और अन्य उत्पादों को लेकर आईं थीं लेकिन उत्पादों के न बिकने से काफी निराश हैं। कहा कि दुकान लगाने के लिए उनके लिए टेंट की व्यवस्था नहीं की गई। साथ ही टेंट हाउस से आईं बैंचों का किराया भी उन्हें ही देना पड़ा। नाराज महिलाओं ने कहा कि वे भविष्य में शायद ही हाट बाजार में शामिल होंगी।
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महिला समूहों की ओर से हाट बाजार लगाने की सूचना ब्लॉक कार्यालय की ओर से हमें नहीं दी गई थी। अचानक हाट बाजार लगने और जानकारी के अभाव में ब्रिकी नहीं हो पाई होगी। अगली बार महिलाओं को कैनोपी (छोटा टेंट) देकर हाट बाजार को बेहतर ढंग से लगाया जाएगा। - संगीता आर्या, सहायक परियोजना निदेशक, डीआरडीए
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