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ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामला: अधीक्षण अभियंता समेत छह अधिकारी निलंबित, 400 से ज्यादा लोग हुए थे बीमार
Mon, 21 Sep 2026 05:49 PM IST
गायत्री जोशी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
Published by: गायत्री जोशी
Updated Mon, 21 Sep 2026 05:49 PM IST
सार
ज्योलीकोट में दूषित पेयजल से दो लोगों की मौत और 400 से अधिक लोगों के बीमार होने के मामले में शासन ने लापरवाही पर जल संस्थान और जल निगम के छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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निलंबित
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
नैनीताल जिले के ज्योलीकोट दूषित पेयजल आपूर्ति प्रकरण मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की पुष्ति होने पर उत्तराखंड जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि में उन्हें मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय देहरादून में किए गए संबद्ध किया गया जबकि उनके स्थान पर नंद किशोर को अधीक्षण अभियंता का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा शासन ने इसी मामले में घोर लापरवाही बरतने पर उत्तराखंड जल संस्थान के सहायक अभियंता नैनीताल मोहन सिंह रावत, अपर सहायक अभियंता रविंद्र, कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा, प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या और पेयजल निर्माण शाखा पेयजल निगम भीमताल के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जबकि जल संस्थान नैनीताल के अधिशासी अभियंता अनीश एम पिल्लई को भविष्य के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई है।
बता दें कि ज्योलीकोट और इसके आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल का सेवन से दो लोगों की मौत हो गई थी और चार सौ से अधिक लोग पीलिया और डायरिया के शिकार हो गए थे। जिनका हल्द्वानी के बेस और सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज किया गया। अब भी इन अस्पतालों में पीलिया और डायरिया के कई मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा कई लोगों ने बीमार पड़ने के बाद निजी अस्पतालों की शरण ली थी। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उक्त अधिकारियों का जवाब तलब किया था। अधिकारियों की ओर से शासन को इस प्रकरण में संतोषजनक जबाव भी नहीं मिला था।
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बता दें कि ज्योलीकोट और इसके आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल का सेवन से दो लोगों की मौत हो गई थी और चार सौ से अधिक लोग पीलिया और डायरिया के शिकार हो गए थे। जिनका हल्द्वानी के बेस और सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज किया गया। अब भी इन अस्पतालों में पीलिया और डायरिया के कई मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा कई लोगों ने बीमार पड़ने के बाद निजी अस्पतालों की शरण ली थी। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उक्त अधिकारियों का जवाब तलब किया था। अधिकारियों की ओर से शासन को इस प्रकरण में संतोषजनक जबाव भी नहीं मिला था।
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