फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Wild animals made MNREGA laborers for tenants

जंगली जानवरों ने काश्तकारों को बना दिया मनरेगा मजदूर

Tue, 06 Feb 2018 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंद्रेश पांडे हल्द्वानी।
अमर उजाला ब्यूरो चंद्रेश पांडे हल्द्वानी। Updated Tue, 06 Feb 2018 02:09 AM IST
विज्ञापन
जंगली जानवर खेती के लिए दुश्मन साबित हो रहे हैं। उनके लगातार बढ़ते आतंक के आगे काश्तकार घुटने टेकने को मजबूर हैं। हाल ये हैं कि काश्तकार खेतीबाड़ी छोड़ मनरेगा में मजदूरी करने को मजबूर हैं। 
विज्ञापन


जिले के भीमताल, रामगढ़, धारी और ओखलकांडा विकासखंड फल और सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। बेतालघाट में मिर्च का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। पिछले कुछ सालों में इन विकास खंडों में बंदरों और सूअरों का आतंक तेजी से बढ़ा है। दिन में बंदरों के झुंड और रात में सूअर फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं। इस समस्या का समाधान न निकलने से काश्तकार खेती छोड़कर मनरेगा में मजदूरी करने को विवश हो गए हैं। 
विज्ञापन

 

काश्तकार बताते हैं कि दो साल पहले तक बेतालघाट ब्लाक के जोशीखोला, रोपा और चापड़ गांवों में गेहूं, गहत, मास, मिर्च और धान समेत कई फसलें लहलहाती थीं। जब से बंदरों और सूअरों का आतंक शुरू हुआ है तब से खेती नुकसान का सौदा साबित होने लगी।  खेती में लगातार नुकसान होता देख बेतालघाट के जोशीखोला निवासी दयाकिशन, पीतांबर, भुवन चंद्र, गोविंद बल्लभ, रोपा गांव निवासी भुवन चंद्र, रेवाधर, गोपाल दत्त और चापड़ गांव निवासी नवीन चंद्र,  कुबेर सिंह ने साल भर पहले खेतीबाड़ी छोड़ दी और तभी से ये सभी काश्तकार मनरेगा के तहत मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पाल रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

बंदरों और सूअरों के आतंक के कारण इन काश्तकारों की लगभग ढाई सौ नाली जमीन पिछले एक डेढ़ साल से बंजर पड़ी हुई है। अकेले बेतालघाट ब्लाक में पिछले एक साल में मनरेगा के तहत जाबकार्ड धारकों की संख्या 6956 से बढ़कर इस साल 7136 हो गई है। 


बंदरों से खेती को बचाने की कोई योजना नहीं
जंगली जानवरों के आतंक के कारण काश्तकरों के खेती छोड़ने जैसी कोई सूचना विभाग के पास नहीं है। सूअर और अन्य छोटे जानवरों से खेती को बचाने के लिए विभाग सुरक्षा दीवार बनवाता है लेकिन बंदरों से खेती को बचाने के लिए विभाग के पास अभी कोई कार्ययोजना नहीं है।
- धनपत कुमार मुख्य कृषि अधिकारी नैनीताल

मौसम आधारित न होकर नुकसान आधारित हो फसली बीमा
हल्द्वानी। जिले के पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र भेजकर फसल बीमा के नियमों में बदलाव की मांग की है।
किसान संगठन के संयोजक और भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप बिष्ट ने काश्तकारों की ओर से वित्त मंत्री को भेजे पत्र में पहाड़ के किसानों की समस्याओं को देखते हुए उनका समाधान कराने की मांग की है।


उन्होंने सरकार से पर्वतीय क्षेत्र में काश्तकारों को खाद, बीज और कीटनाशकों में अनुदान दिलाने, फसल बीमा के नियमों में बदलाव कर बीमा को मौसम आधारित के बजाय नुकसान आधारित कराने, हल्द्वानी में मेगा फूड पार्क स्थापित कराने, फसलों के अलावा पहाड़ में होने वाले फलों के लिए क्लस्टर बनवाने और तेलंगाना राज्य की तर्ज पर राज्य में किसान पेंशन योजना अथवा काश्तकारों को सालाना दस हजार रुपये देने का प्रावधान कराने की मांग की है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed