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जब कूड़ा उठाना ही नहीं था तो करोड़ों रुपये क्यों फूंक दिए
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sat, 16 Dec 2017 02:09 AM IST
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हल्द्वानली नगर निगम में खडे नए वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम की व्यवस्थाओं का भी भगवान ही मालिक है। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह करने की तैयारियों का ढिंढोरा तो जोर शोर से पीटा गया मगर हकीकत कुछ और है। अब तक मेयर न अधिकारी तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि यह योजना कैसे परवान चढ़े। यह हाल तब है जबकि करोड़ों रुपये खर्च कर गाड़ियां खरीद डाली। जो तीन महीने से गैराज में खड़ी हैं।
खास बात तो यह है कि नगर निगम अब तक आउटसोर्स एजेंसी को ही तय नहीं पाया है। ठोस कूड़ा प्रबंधन कार्यक्रम के तहत शासन ने नगर निगम को रकम आवंटित की थी। इसके तहत नगर निगम में 33 हॉपर, पांच कांपेक्टर, एक जेसीबी और जानवरों को पकड़ने वाली एक गाड़ी खरीदी जानी थी।
इसके लिए गौलापार ट्रंचिंग ग्राउंड के पास कंपोस्ट प्लांट भी लगना था और कूड़ा उठाने के लिए आउटसोर्स एजेंसी भी नियुक्त की जानी थी। निगम के अधिकारियों ने 2.74 करोड़ की लागत से 33 हॉपर, पांच कांपेक्टर, एक जेसीबी और जानवर पकड़ने वाली गाड़ी तीन माह पहले खरीद ली। ये सभी गैराज में धूल फांक रहे हैं।
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कांपेक्टर बनने गए हैं। आउटसोर्स एजेंसियों को बुलाया गया है। एक महीने के अंदर घर-घर से कूड़ा उठने लगेगा। इससे 32 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा। आउअसोर्स एजेंसी का चयन नहीं होने से ये वाहन नहीं चल पा रहे हैं।
- जोगेंद्र रौतेला मेयर
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खास बात तो यह है कि नगर निगम अब तक आउटसोर्स एजेंसी को ही तय नहीं पाया है। ठोस कूड़ा प्रबंधन कार्यक्रम के तहत शासन ने नगर निगम को रकम आवंटित की थी। इसके तहत नगर निगम में 33 हॉपर, पांच कांपेक्टर, एक जेसीबी और जानवरों को पकड़ने वाली एक गाड़ी खरीदी जानी थी।
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इसके लिए गौलापार ट्रंचिंग ग्राउंड के पास कंपोस्ट प्लांट भी लगना था और कूड़ा उठाने के लिए आउटसोर्स एजेंसी भी नियुक्त की जानी थी। निगम के अधिकारियों ने 2.74 करोड़ की लागत से 33 हॉपर, पांच कांपेक्टर, एक जेसीबी और जानवर पकड़ने वाली गाड़ी तीन माह पहले खरीद ली। ये सभी गैराज में धूल फांक रहे हैं।
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कांपेक्टर बनने गए हैं। आउटसोर्स एजेंसियों को बुलाया गया है। एक महीने के अंदर घर-घर से कूड़ा उठने लगेगा। इससे 32 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा। आउअसोर्स एजेंसी का चयन नहीं होने से ये वाहन नहीं चल पा रहे हैं।
- जोगेंद्र रौतेला मेयर