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वन संरक्षक कार्यालय में ग्रामीणों का धरना
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हल्द्वानी। हाथियों का झुंड आबादी क्षेत्र में पहुंचकर फसल और भवनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके विरोध में पदमपुर देवलिया के ग्रामीणों ने मंगलवार को वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त कार्यालय में वन्यजीवों से सुरक्षा की मांग को लेकर धरना देकर मांग पत्र सौंपा।
ग्राम प्रधान रमेश जोशी ने कहा कि पदमपुर देवलिया और सूपी भगवानपुर में करीब तीन हजार की आबादी हैं। दोनों गांवों में शाम के समय अक्सर हाथी पहुंच जाते हैं और फसलों के साथ घरों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का शाम सात बजे के बाद घर से निकलना मुश्किल हो गया है। इससे पहले भी वन्यजीवों से सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वन संरक्षक कार्यालय में नारेबाजी करने वालों मेें संदीप पांडे, बालम सिंह बिष्ट, हरेंद्र बोरा, हेम चंद्र, गरिमा पांडे आदि मौजूद रहे। ग्राम प्रधान जोशी ने कहा कि वन संरक्षक ने प्रभावित क्षेत्र का शाम चार बजे दौरा करने की बात कही थी लेकिन वह नहीं पहुंचे। चेतावनी दी कि यदि बुधवार को अधिकारी नहीं आए तो ग्रामीण आंदोलन तेज करेंगे।
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यह मांग है
- ग्रामीण क्षेत्रों में तीन किमी तक सोलर फेंसिंग की जाए।
- किसानों की फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए।
- पूर्व प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर खोला जाए।
- हाथी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाए और दीवारों को नहरों की तर्ज पर बनाया जाए।
- जंगल में सागौन की जगह फलदार प्रजातियों का रोपण किया जाए।
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ग्राम प्रधान रमेश जोशी ने कहा कि पदमपुर देवलिया और सूपी भगवानपुर में करीब तीन हजार की आबादी हैं। दोनों गांवों में शाम के समय अक्सर हाथी पहुंच जाते हैं और फसलों के साथ घरों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का शाम सात बजे के बाद घर से निकलना मुश्किल हो गया है। इससे पहले भी वन्यजीवों से सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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वन संरक्षक कार्यालय में नारेबाजी करने वालों मेें संदीप पांडे, बालम सिंह बिष्ट, हरेंद्र बोरा, हेम चंद्र, गरिमा पांडे आदि मौजूद रहे। ग्राम प्रधान जोशी ने कहा कि वन संरक्षक ने प्रभावित क्षेत्र का शाम चार बजे दौरा करने की बात कही थी लेकिन वह नहीं पहुंचे। चेतावनी दी कि यदि बुधवार को अधिकारी नहीं आए तो ग्रामीण आंदोलन तेज करेंगे।
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यह मांग है
- ग्रामीण क्षेत्रों में तीन किमी तक सोलर फेंसिंग की जाए।
- किसानों की फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए।
- पूर्व प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर खोला जाए।
- हाथी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाए और दीवारों को नहरों की तर्ज पर बनाया जाए।
- जंगल में सागौन की जगह फलदार प्रजातियों का रोपण किया जाए।