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Nainital News: दुग्ध उत्पादन से जुड़का गांव की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
Sat, 03 Oct 2026 12:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:14 AM IST
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काशीपुर। बाजपुर विकासखंड के ग्राम जुड़का में एकता स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गोशाला चलाकर आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं। चार माह पहले शुरू की गई इस गोशाला ने महिलाओं की आजीविका को सुधारने में मदद की है।
एकता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शीला देवी, सचिव पिंकी देवी और कोषाध्यक्ष रीना देवी ने बताया कि समूह में कुल 10 महिलाएं हैं। इनमें आरती, वीरवती, अनीता, लक्ष्मी, प्रकाश देवी आदि शामिल हैं। सभी मिलकर गोशाला का संचालन करती हैं। वर्तमान में समूह के पास 10 दुधारू पशु हैं। इनमें आठ गाय और दो भैंस हैं। सभी पशुओं का दूध रोजाना डेयरी में जाता है। समूह रोजाना 70 लीटर तक दूध डेयरी को सप्लाई कर रहा है। गाय का दूध का मूल्य 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 65 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है। हर महीने 90 हजार रुपये से अधिक की दूध की बिक्री हो रही है। भविष्य में इसे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं।
तीन लाख के लोन से की शुरुआत
समूह ने रीप परियोजना के तहत दस लाख रुपये का लोन लेकर गौशाला की शुरुआत की थी। बीडीओ कमल किशाेर पांडे ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन और कृषि आधारित रोजगार से जोड़ना है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। जुड़का का यह समूह अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
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एकता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शीला देवी, सचिव पिंकी देवी और कोषाध्यक्ष रीना देवी ने बताया कि समूह में कुल 10 महिलाएं हैं। इनमें आरती, वीरवती, अनीता, लक्ष्मी, प्रकाश देवी आदि शामिल हैं। सभी मिलकर गोशाला का संचालन करती हैं। वर्तमान में समूह के पास 10 दुधारू पशु हैं। इनमें आठ गाय और दो भैंस हैं। सभी पशुओं का दूध रोजाना डेयरी में जाता है। समूह रोजाना 70 लीटर तक दूध डेयरी को सप्लाई कर रहा है। गाय का दूध का मूल्य 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 65 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है। हर महीने 90 हजार रुपये से अधिक की दूध की बिक्री हो रही है। भविष्य में इसे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं।
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तीन लाख के लोन से की शुरुआत
समूह ने रीप परियोजना के तहत दस लाख रुपये का लोन लेकर गौशाला की शुरुआत की थी। बीडीओ कमल किशाेर पांडे ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन और कृषि आधारित रोजगार से जोड़ना है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। जुड़का का यह समूह अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
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