{"_id":"672ba35c3ecaa21f7c0374e4","slug":"uttarakhand-high-court-strict-orders-to-bro-dg-to-appear-in-court-on-4-december-2024-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: आदेश का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट सख्त, बीआरओ के डीजी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: आदेश का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट सख्त, बीआरओ के डीजी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश
Wed, 06 Nov 2024 10:43 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 06 Nov 2024 10:43 PM IST
सार
बीते 15 अक्तूबर को कोर्ट ने डीजी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए 6 नवंबर को पेश होने के आदेश दिए थे लेकिन वे आज न तो कोर्ट में पेश हुए और ना ही कोई जवाब पेश किया। विभाग ने सीधे संबंधित अधिकारियों को भेज दिया।
विज्ञापन
उत्तराखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रोड निर्माण के दौरान याचिकाकर्ताओं को मुआवजा नहीं दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ ) के डायरेक्टर जनरल को पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर चार दिसंबर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
विज्ञापन
बीते 15 अक्तूबर को कोर्ट ने डीजी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए 6 नवंबर को पेश होने के आदेश दिए थे लेकिन वे आज न तो कोर्ट में पेश हुए और ना ही कोई जवाब पेश किया। विभाग ने सीधे संबंधित अधिकारियों को भेज दिया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब डीजी के खिलाफ जमानती वारंट जारी हुए हैं तो उनको कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए था।
विज्ञापन
सुनवाई पर बीआरओ की तरफ से कहा गया कि उनकी व्यक्तिगत पेशी को माफ किया जाए। इस पर कोर्ट ने पूर्व के आदेश को बरकरार रखते हुए उन्हें चार दिसंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
Haridwar: राजकीय बालगृह रोशनाबाद से रावली महदूद में स्कूल गए तीन बच्चे फरार, तलाश में जुटी पुलिस
धारचूला निवासी कुंदन सिंह व अन्य ने 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कहा था कि 1996 में तवाघाट से पांगती के लिए बीआरओ के द्वारा रोड का निर्माण किया गया। निर्माण के दौरान बीआरओ ने रोड का मलबा उनकी कृषि योग्य भूमि पर डाल दिया। इससे उनकी कृषि भूमि क्षतिग्रस्त हो गई। जब उन्होंने मुआवजा मांगा तो बीआरओ की ओर से आश्वासन तो दिया गया लेकिन मुआवजा नहीं।