फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Questions raised regarding actual number of madrasas only 33 received recognition so far

उत्तराखंड: प्रदेश में मदरसों की वास्तविक संख्या पर उठ रहे हैं सवाल; 452 में से अब तक 33 को ही मिली मान्यता

Mon, 07 Sep 2026 07:41 PM IST
Alka Tyagi बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 07 Sep 2026 07:41 PM IST
सार

अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी बड़ी संख्या में मदरसों के मान्यता प्रक्रिया में आगे नहीं आने की बात सामने आई है।

विज्ञापन
Uttarakhand Questions raised regarding actual number of madrasas only 33 received recognition so far
उत्तराखंड में मदरसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था बदलने के साथ अब सबसे बड़ा सवाल मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर खड़ा हो गया है। मदरसा बोर्ड ने 452 मदरसों की सूची जारी की थी, जबकि शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में इतने मदरसे नहीं हैं। विभाग को केवल उन मदरसों की जानकारी है, जिसे मिड डे मील दिया जा रहा था।

विज्ञापन


उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को मदरसों की जो सूची दी। उसमें हरिद्वार जिले में तहतानिया, फौकानियां, मुंशी-मौलवी एवं आलिम, अरबी-फारसी की मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 270 दिखाई गई, लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि इस जिले में मिड डे मील केवल 131 मदरसों को दिया जा रहा था। अन्य मदरसों का विभाग के पास रिकाॅर्ड नहीं है।
विज्ञापन


यही हाल कुछ अन्य जिलों का है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बाकी मदरसे कहां गए ? क्या मदरसे बंद हो चुके हैं ? या फिर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मदरसों की वास्तविक स्थिति कभी जमीन पर जांची ही नहीं गई ? हालांकि विभागीय मंत्री खजानदास का कहना है कि कुछ मदरसे एक कमरे में चल रहे थे। जो अब बंद हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

कर्णप्रयाग: बारिश, प्रसव पीड़ा और छह किमी का सफर; पहले पैदल फिर कुर्सी के सहारे गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल

बोर्ड खत्म हुआ तो सामने आया रिकॉर्ड का अंतर
मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अब सभी संबंधित संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता हासिल करनी है, नियमानुसार पूर्व में मान्यता प्राप्त मदरसों को भी नए शैक्षिक सत्र में धार्मिक शिक्षा संचालित करने के लिए प्राधिकरण से मान्यता लेनी है, लेकिन मान्यता तो दूर मदरसों की संख्या को लेकर भी शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अंतर है। वहीं, 452 में से अब तक 33 मदरसों को ही मान्यता मिली है।

मान्यता के लिए आगे नहीं आ रहे मदरसे
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी बड़ी संख्या में मदरसों के मान्यता प्रक्रिया में आगे नहीं आने की बात सामने आई है। हरिद्वार में ही बड़ी संख्या में मदरसे संचालित होने का दावा किया गया, लेकिन शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत कम संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदन किया। यही हाल देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले का है।

मदरसा बोर्ड के मुताबिक राज्य में 452 मदरसे हैं, शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में इनकी संख्या कम है। विभाग का कहना है कि जिन मदरसों को मिड डे मील दिया जा रहा था, उसके पास केवल उसकी जानकारी है। मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रकरण की जांच करवाई जाएगी।
- डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed