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UK News: संकरी सड़कों पर अनियंत्रित वाहन संख्या पर कोर्ट सख्त, नैनीताल में बढ़ते ट्रैफिक दबाव पर जताई चिंता

Sat, 18 Jul 2026 11:14 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Sat, 18 Jul 2026 11:14 AM IST
सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल की संकरी सड़कों, भौगोलिक सीमाओं और सीमित पार्किंग व्यवस्था के चलते बढ़ते ट्रैफिक दबाव व जाम की समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। 

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Uttarakhand High Court strict on uncontrolled vehicle numbers on narrow roads in nainital
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने कहा कि नैनीताल की संकरी सड़कें और भौगोलिक परिस्थितियां अनियंत्रित संख्या में वाहनों का भार सहन करने की अनुमति नहीं देतीं। पार्किंग की सीमित व्यवस्था भी शहर की प्रमुख समस्याओं में से एक है और पार्किंग से संबंधित मुद्दा भी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव, जाम और पार्किंग की समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने नगर पालिका नैनीताल और सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेकर शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नैनीताल में अनियंत्रित वाहनों का प्रवेश गंभीर समस्या बन चुकी है। कहा कि यह सर्वविदित है कि पर्यटन सीजन और विशेषकर सप्ताह के अंत में नैनीताल आने वाले वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। हजारों पर्यटकों के कारण शहर में कई-कई घंटे तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में यदि किसी स्थानीय निवासी या पर्यटक की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो सकता है जिससे उसकी जान का खतरा भी पैदा हो सकता है।

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खंडपीठ ने कहा कि यदि नगर पालिका को शहर में आने वाले वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं दी जाती है तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक सीमाएं सड़कों के विस्तार की अनुमति नहीं देतीं और लगातार बढ़ते वाहनों से न केवल ट्रैफिक जाम बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। लंबे समय तक चालू रहने वाले वाहनों के इंजन दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं जबकि सबसे अधिक परेशानी पैदल चलने वाले लोगों को होती है जिन्हें जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाले धुएं का सामना करना पड़ता है।

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पूर्व के आदेशों पर विचार आवश्यक
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 15 अप्रैल और 23 अप्रैल 2025 के आदेशों में उठाए गए अतिरिक्त जनहित के मुद्दों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।



अदालत ने की ये तल्ख टिप्पणियां

- यदि कोई स्थानीय या पर्यटक की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो जाम के कारण उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो सकता है

- यदि नगर पालिका को शहर में आने वाले वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं दी जाती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं

- पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां सड़कों के विस्तार की अनुमति नहीं देतीं - लगातार बढ़ते वाहनों से न केवल ट्रैफिक जाम बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है

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