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UK Highcourt:  हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं

Sun, 15 Feb 2026 04:09 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 15 Feb 2026 04:09 PM IST
सार

आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वे दोनों वयस्क थे। उनके बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध रहे। याचिका में कहा कि प्राथमिकी में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे साबित हो सके कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने का थी।

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Uttarakhand High Court:  Big decision long term consensual relationship is not Missed
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मसूरी की एक युवती ने पुलिस में शिकायत की थी एक युवक ने उससे शादी का झांसा देकर संबंध बनाए हैं। युवती के अनुसार आरोपी ने 45 दिनों के भीतर शादी करने का आश्वासन दिया था लेकिन बाद में मुकर गया।

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पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की, जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वे दोनों वयस्क थे। उनके बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध रहे। याचिका में कहा कि प्राथमिकी में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे साबित हो सके कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने का थी। उनके अनुसार, यह एक असफल रिश्ता था न कि आपराधिक कृत्य।
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राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया कि युवती की सहमति शादी के वादे पर आधारित थी। इस बात का निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए कि वादा शुरू से झूठा था या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यदि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे हों तो केवल विवाह न हो पाने के आधार पर सहमति को अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी का इरादा शुरू से ही शादी नहीं करने का था।

कोर्ट ने कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के आपराधिक मुकदमे को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने देहरादून की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही और 22 जुलाई 2023 की चार्जशीट को रद्द कर दिया।

 

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