Uttarakhand Forest Fire: नैनीताल के जंगलों में नहीं थम रहा आग का तांडव, चारों तरफ छाया धुआं
Uttarakhand Forest Fire: उत्तराखंड के जंगल एक बार फिर धधकने लगे हैं। नैनीताल के पास नलेना-ज्योलिकोट निरीक्षण भवन मोटर मार्ग के वन क्षेत्र में आग लग गई। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटें उठने लगी। इससे आबादी क्षेत्र के लोगों को खतरा महसूस होने लगा।
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नलेना-ज्योलिकोट निरीक्षण भवन मोटर मार्ग के मध्य रविवार रात करीब आठ बजे वन क्षेत्र में आग लग गई। देखते-देखते आग की ऊंची लपटें उठने लगी। आसपास के आबादी क्षेत्र के लोगों को खतरा महसूस होने लगा तो उन्होंने वन विभाग और 112 को सूचना दी गई। सूचना पर वन विभाग का दल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने में जुट गया। इधर, नैनीताल से अग्निशमन वाहन पूरे दल बल के साथ मौके के लिए रवाना हो गया। लेकिन निरीक्षण भवन मोटर मार्ग पर निर्माणाधीन कलवर्ट में उक्त वाहन का अगला हिस्सा धंसने से वाहन फंस गया। काफी कोशिशों के बाद भी वाहन नहीं निकल पाया। समाचार लिखे जाने तक वाहन को निकालने की कोशिश की जा रही थी। उधर, वन कर्मी आग पर काबू पाने के लिए जुटे थे।
इधर बेतालघाट ब्लॉक के जोग्याड़ी से लगे जंगल में रविवार की दोपहर अचानक आग लगने से वन संपदा को नुकसान पहुंचा हैं। वहीं तेज हवाओं के चलने से आग तेजी से जंगल में फैल गई। इधर पीपलचौड़ से लगे जंगल में भी देर शाम तक आग लगी रही। खबर लिखे जाने तक दोनों जगह लगी आग नहीं बुझ पाई थी। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से जंगल में आग लगाने वालों से कार्रवाई की मांग की है।
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वनाग्नि को लेकर किया जागरूक: रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ओर से सीमावर्ती गांवों में जन जागरूकता अभियान केे तहत बिजरानी रेंज के अंतर्गत आमडंडा खत्तावासियों एवं स्कूली बच्चों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा मानव वन्यजीव संघर्ष के न्यूनीकरण करने को जागरूक किया गया। यहां वन दरोगा नवीन चंद्र पपनै, वन आरक्षी मोहन उप्रेती, चिंताराम, गोविंद राम आदि रहे।
जंगल में वनाग्नि की घटनाओं में आई कमी
हल्द्वानी। 24 घंटे में वनाग्नि की घटनाओं में कमी आई है। संबंधित अवधि में प्रदेश के जंगलों में पांच जगह आग लगने की घटना रिपोर्ट हुई है। यह सभी घटनाएं कुमाऊं मंडल में हुई हैं। वनाग्नि से 16 हेक्टेअर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। 13 अप्रैल को जंगल में वनाग्नि की 25 घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं।