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Nainital News: उपनल कर्मियों ने विरोध स्वरूप बांह में काले फीते बांधे
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में कार्यरत साढ़े पांच सौ से अधिक उपनल कर्मियों को पांच माह से वेतन न देने के विरोध में प्रदेश भर के उपनल कर्मियों ने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू कर दिया है। सोमवार को सभी जिलों में उपनल कर्मियों ने बांह में काले फीते बांधकर काम किया।
उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि 20-22 वर्षों से नियमित सेवाएं देने के बावजूद वेतन न मिलना कार्मिकों और उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट है। कहा कि इसे लेकर शासन के परस्पर विरोधी आदेश स्थिति को और अधिक जटिल बना रहे हैं। बताया कि एसटीएच प्रशासन का कहना है कि शासनादेश संख्या 828, दिनांक 25 अक्तूबर 2019 के अनुसार नियमित एवं स्वीकृत पद न होने के कारण कार्मिकों का वेतन आहरित नहीं किया जा सकता। संघ ने स्पष्ट किया कि चिकित्सालय प्रशासन वर्ष 2016 से ही और उससे पूर्व से भी नियमित पदों की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन एवं निदेशालय को भेजता रहा है। 20 जुलाई 2016 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में चिकित्सालय में स्वीकृत पदों से अधिक कार्मिकों की तैनाती पर चर्चा हुई थी। इस बैठक के निर्णय के आधार पर फरवरी 2025 तक का वेतन आहरित किया गया था। कार्यवृत्त में चिकित्सालय की आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त पदों की स्वीकृति देने का भी उल्लेख किया गया था। संघ का कहना है कि तब से आज तक प्रस्ताव भेजने के बाद भी पदों की स्वीकृति न मिलना शासन की गंभीर लापरवाही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र बकाया वेतन भुगतान एवं पदों की स्वीकृति नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
तीन घंटे कार्य बहिष्कार रहा जारी
बकाया वेतन भुगतान और पदों के सृजन की मांग को लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल में उपनल कर्मियों ने सोमवार सुबह तीन घंटे का कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। अस्पताल प्रबंधन व सरकार पर कर्मचारियों की मांगों की उपेक्षा का आरोप लगाया। कार्य बहिष्कार के दौरान मरीज और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि 20-22 वर्षों से नियमित सेवाएं देने के बावजूद वेतन न मिलना कार्मिकों और उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट है। कहा कि इसे लेकर शासन के परस्पर विरोधी आदेश स्थिति को और अधिक जटिल बना रहे हैं। बताया कि एसटीएच प्रशासन का कहना है कि शासनादेश संख्या 828, दिनांक 25 अक्तूबर 2019 के अनुसार नियमित एवं स्वीकृत पद न होने के कारण कार्मिकों का वेतन आहरित नहीं किया जा सकता। संघ ने स्पष्ट किया कि चिकित्सालय प्रशासन वर्ष 2016 से ही और उससे पूर्व से भी नियमित पदों की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन एवं निदेशालय को भेजता रहा है। 20 जुलाई 2016 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में चिकित्सालय में स्वीकृत पदों से अधिक कार्मिकों की तैनाती पर चर्चा हुई थी। इस बैठक के निर्णय के आधार पर फरवरी 2025 तक का वेतन आहरित किया गया था। कार्यवृत्त में चिकित्सालय की आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त पदों की स्वीकृति देने का भी उल्लेख किया गया था। संघ का कहना है कि तब से आज तक प्रस्ताव भेजने के बाद भी पदों की स्वीकृति न मिलना शासन की गंभीर लापरवाही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र बकाया वेतन भुगतान एवं पदों की स्वीकृति नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
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तीन घंटे कार्य बहिष्कार रहा जारी
बकाया वेतन भुगतान और पदों के सृजन की मांग को लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल में उपनल कर्मियों ने सोमवार सुबह तीन घंटे का कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। अस्पताल प्रबंधन व सरकार पर कर्मचारियों की मांगों की उपेक्षा का आरोप लगाया। कार्य बहिष्कार के दौरान मरीज और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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