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बदनसीबी: न चार कंधे, न चार पैसे
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
Updated Tue, 02 Jun 2015 02:05 AM IST
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आर्थिक हालात सुधरने के बड़े-बड़े दावे होते हैं, सपनों की बातें होती हैं। पर इन बातों और दावों की कितनी सच्चाई है, वह एक बार फिर बेस अस्पताल में दिखी। बिहार के रहने वाला सुनील की मां ज्योति (75) का इलाज बेस में चल रहा था, एक सप्ताह तक वह जिंदगी और मौत के बीच लड़ती रही।
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आखिर में उसने मौत के सामने घुटने टेक दिए, तो बेटे ने हालात के सामने। सुनील के पास इतने लोगोें भी नहीं थे कि वह कांधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचा सके, न ही उसके पास इतने रुपये थे कि वह उन्हें चिता जला सके। जिन पुलिस कर्मियों की इंसानियत और नीयत को लेकर तमाम बातें होती है, उसी वर्ग के पुलिस कर्मी और समाज से जुड़े लोग मदद करने को सामने आए तो अंत्येष्टि हो सकी।
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बिहार निवासी धन सिंह यादव का परिवार नैनीताल में मजदूरी कर आजीविका चलाता है। एक सप्ताह पहले धन सिंह की पत्नी ज्योति (75) की तबियत खराब हो गई। बेटे सुनील यादव ने मां को बेस अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार को वृद्धा की मौत हो गई। मां की अंत्येष्टि के लिए सुनील के पास पैसे नहीं थे। सीओ राजेंद्र सिंह ह्यांकी, कोतवाल आर मेहता, समाजसेवी प्रेम बेलवाल ने वृद्धा के अंतिम संस्कार के लिए पैसे जुटाए। प्रेम बेलवाल ने कफन खरीदकर दिया। इसके बाद ही रानीबाग स्थित घाट पर अंतिम संस्कार हुआ।
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