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दो घंटे मरीज को खून बहता रहा, पर डाक्टर नहीं आए

Wed, 15 Apr 2015 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी Updated Wed, 15 Apr 2015 02:14 AM IST
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Two hours bleeding patient, the doctor did not

सुशीला तिवारी अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही के चलते एक महिला की असामयिक मौत हो गई। सड़क हादसे में घायल हुई पत्रकार की पत्नी किरण जोशी के पेट से खून बहता रहा, लेकिन डाक्टर इलाज के लिए नहीं आए और जब आए भी तो इलाज करने के बजाए पहले एक्सरे की फीस जमा कराने के लिए दबाव बनाते रहे।

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मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने महिला की जान बचाने से ज्यादा एक्सरे फीस जमा करना जरूरी समझा। अस्पताल में 11.10 बजे लाई गई महिला का इलाज ढाई घंटे बाद डेढ़ बजे शुरू हुआ। डाक्टरों तो डाक्टर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) डा.एके पांडे (जिन पर अस्पताल की सारी गतिविधियों की जिम्मेदारी है) भी कम लापरवाह नहीं निकले। उन्होंने प्राचार्य डा.आरसी पुरोहित के तीन बार के आदेश के बावजूद महिला के इलाज के लिए कदम नहीं उठाया।
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इतना ही नहीं जब तीन बजे उनसे महिला की मौत के बारे में पूछा गया तो उन्हें इस संबंध में कुछ भी पता नहीं था और इसके चार घंटे बाद वह सब कुछ बताने की स्थिति में आ गए। सवाल उठता है कि यदि एमएस ने वक्त रहते कार्रवाई की होती तो महिला की जान बच सकती थी।
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उधर, किरण जोशी का समय पर इलाज नहीं कराने पर अस्पताल में पत्रकारों ने हंगामा किया। हंगामे की सूचना मिलने पर एसपी सिटी, सीओ, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स भी वहां पहुंच गई। सिटी मजिस्ट्रेट के मजिस्ट्रेटी जांच के आश्वासन के बाद लोग माने। तीनपानी निवासी पत्रकार तारा चंद्र जोशी अपनी पत्नी किरण जोशी (37) के साथ स्कूटी से रानीबाग से आ रहे थे। गांधी स्कूल के पास ट्रक (यूपी-03-0830) ने ओवर टेक किया।

ट्रक की साइड छूने के कारण स्कूटी का संतुलित बिगड़ गया और दोनों सड़क पर गिर पड़े, जिससे किरण के पेट से (दाहिनी ओर) खून निकलने पर एक निजी वाहन से सिटी हास्पिटल ले जाया गया। सिटी हास्पिटल से डाक्टरों ने सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। तारा चंद्र जोशी ने बताया कि सुबह 11.10 मिनट पर वह एसटीएच पहुंचे और इमरजेंसी में किरण को लेकर गए। इमरजेंसी में मौजूद डाक्टर शबाना ने मरीज को देखते ही चेस्ट का एक्स-रे और सिर का सीटी स्कैन कराने के लिए लिख दिया। किसी भी डाक्टर ने किरण के पेट से निकल रहे खून को रोकने का प्रयास नहीं किया।
जोशी ने बताया कि डाक्टरों ने इलाज शुरू नहीं किया और एक्सरे की फीस जाम करने के लिए दबाव बनाते रहे। डाक्टरों ने कहा कि सीटी स्कैन दोपहर दो बजे के बाद होगा। कुछ ही देर बाद इमरजेंसी से पर्चा भी गायब हो गया। दोपहर डेढ़ बजे एमएस डा.पांडेय के निर्देश पर मरीज का इलाज शुरू हुआ और दस मिनट बाद किरण ने दम तोड़ दिया। उधर, किरण की मौत की खबर मिलते ही मीडिया कर्मी अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। प्रशासन के तमाम प्रयास के बाद भी एमएस अस्पताल से बाहर नहीं आए और इमरजेंसी में कार्यरत डाक्टर भी नदारद हो गईं।

प्राचार्य ने मामले की जांच का आश्वासन दिया, मगर पत्रकार मजिस्ट्रेटी जांच की मांग कर रहे थे। सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल ने कहा कि मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जिलाधिकारी से संस्तुति करेंगे। पुलिस ने ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज और मरीज को क्या इलाज दिया गया इससे संबंधित दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं।  

डीएम ने दिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश
जिलाधिकारी दीपक रावत ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि डाक्टरों को अपने व्यवहार और कार्यशैली में परिवर्तन लाना चाहिए। रावत ने कहा कि मामले की पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी।

ओपीडी में बैठे रहे सर्जरी विभाग के प्रोफेसर
एक महिला के शरीर से रक्तस्राव होता रहा और प्रोफेसर डा. केएस शाही ओपीडी में बैठे रहे। ताराचंद्र जोशी ने बताया कि आन काल आने की ड्यूटी प्रोफेसर डा.शाही की थी, मगर कई बार बुलाने के बावजूद वे नहीं आए और उनकी पत्नी के शरीर से लगातार खून बहता रहा। डाक्टरों ने सर्जरी करना तक उचित नहीं समझा।

मौत के एक घंटे बाद एमएस को कुछ पता नहीं था
1.40 बजे जब किरण की मौत हो गई तो इसके एक घंटे बाद जब पत्रकारों ने मामले की जानकारी एमएस डा. एके पांडेय से ली तो वह चुप्पी साधे रहे। उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। चार घंटे बाद शाम सात बजे जब एमएस से फोन पर बात की गई तो वह एक लाइन में मौत के कई कारण गिना दिए। उन्होंने बताया कि महिला के स्पाइन, पेल्विक के साथ ही अन्य हिस्सों में फ्रैक्चर थे। फेफड़े भी डैमेज हो चुके थे, जिससे मरीज को बचाना मुश्किल था। फेफड़े डैमेज होने के कारण ही रक्तस्राव हो रहा था और मरीज को आक्सीजन नहीं मिल पा रही थी। ऐसे मरीज को ट्रामा सेंटर में ही बचाया जा सकता था।


मरीज के इलाज के लिए मैंने तीन बार फोन किया था। मेरे फोन के बाद ही एमएस इमरजेंसी में मरीज को देखने गए थे, मरीज का इलाज करने में लेटलतीफी हुई है और इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जो भी डाक्टर दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करेंगे।
-डा. आरसी पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज

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