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Nainital News: भीमताल डैम की दरारों का ‘इलाज’ शुरू
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भीमताल डैम में ड्रिल मशीन से रिसाव को लेकर अध्ययन करते हुए विशेषज्ञ।
भीमताल (नैनीताल)। ब्रिटिशकालीन भीमताल डैम में पड़ रही दरारों के कारण पानी के रिसाव की मरम्मत कार्य का अध्ययन शुक्रवार से शुरू हो गया है। बता दें कि एक करोड़ 99 लाख रुपये डैम की मरम्मत के लिए स्वीकृत हुए हैं।
शुक्रवार को भीमताल डैम में दिल्ली से आई जिओ टेक्निकल की टीम के विशेषज्ञों ने ड्रिल और तकनीकी मशीनों की मदद से डैम की दीवारों पर पानी के रिसाव वाली जगहों पर काम शुरू किया। विशेषज्ञों की ओर से ड्रिल करके एक लोहे की रॉड की मदद से सेंसर वाली चिप को डैम के अंदर डाला गया। इससे पता चलेगा कि दीवारों से पानी का रिसाव कितना हो रहा है।
भू तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि भीमताल डैम का निर्माण अंग्रेजों की ओर से किया गया था। उन्होंने कहा कि डैम के निर्माण को 140 से अधिक साल हो चुके है। डैम के पुराने होने के चलते उसकी दीवारों से कई जगह पानी का रिसाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि दरारों से पानी का रिसाव बढ़ने पर खतरा बढ़ सकता है। रिसाव किन जगहों से हो रहा है, इसके अध्ययन के लिए काम शुरू कर दिया है। डैम के पुराने होने के चलते ड्रिल का काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है। कहा कि मशीन से मिले डाटा के बाद ही रिसाव का पता चलेगा। रिसाव का पता चलने के बाद मरम्मत कार्य शुरू कर किया जाएगा। इस दौरान सहायक योगेश कुमार मौजूद रहे।
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शुक्रवार को भीमताल डैम में दिल्ली से आई जिओ टेक्निकल की टीम के विशेषज्ञों ने ड्रिल और तकनीकी मशीनों की मदद से डैम की दीवारों पर पानी के रिसाव वाली जगहों पर काम शुरू किया। विशेषज्ञों की ओर से ड्रिल करके एक लोहे की रॉड की मदद से सेंसर वाली चिप को डैम के अंदर डाला गया। इससे पता चलेगा कि दीवारों से पानी का रिसाव कितना हो रहा है।
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भू तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि भीमताल डैम का निर्माण अंग्रेजों की ओर से किया गया था। उन्होंने कहा कि डैम के निर्माण को 140 से अधिक साल हो चुके है। डैम के पुराने होने के चलते उसकी दीवारों से कई जगह पानी का रिसाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि दरारों से पानी का रिसाव बढ़ने पर खतरा बढ़ सकता है। रिसाव किन जगहों से हो रहा है, इसके अध्ययन के लिए काम शुरू कर दिया है। डैम के पुराने होने के चलते ड्रिल का काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है। कहा कि मशीन से मिले डाटा के बाद ही रिसाव का पता चलेगा। रिसाव का पता चलने के बाद मरम्मत कार्य शुरू कर किया जाएगा। इस दौरान सहायक योगेश कुमार मौजूद रहे।
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