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हर दिन 15 लाख की मार: यह है वीकेंड का भार, डायवर्जन का सबसे ज्यादा नुकसान झेल रहे ट्रांसपोर्ट वाले वाहन
Mon, 12 May 2025 10:51 AM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
Published by: हीरा मेहरा
Updated Mon, 12 May 2025 10:51 AM IST
सार
वीकेंड के दिनों में वाहनों के पहिये थमने से ट्रांसपोर्ट कारोबारी बेहाल हैं। एक ट्रक यदि एक दिन जाम में फंसा तो ट्रांसपोर्टर को प्रतिदिन तीन हजार रुपये का नुकसान होता है। मार्केट भी खराब हाेता है।
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सांकेतिक तस्वीर।
विस्तार
वीकेंड के दिनों में वाहनों के पहिये थमने से ट्रांसपोर्ट कारोबारी बेहाल हैं। कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी तथा आसपास के इलाके से हर दिन पहाड़ पर खाद्य रसद व अन्य जरूरी सामान लेकर जाते हैं। दो साल पहले तक रानीखेत की ओर जाने वाला एक ट्रक माह में 25 दिन माल ले जाता था। वहीं अब सप्ताह के तीन और माह के 12 दिन ट्रैफिक प्लान के कारण नहीं जा पाते हैं। बाकी दिनों में भी कैंची, भवाली और भीमताल में जाम में फंसने के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।
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एक ट्रक यदि एक दिन जाम में फंसा तो ट्रांसपोर्टर को प्रतिदिन तीन हजार रुपये का नुकसान होता है। मार्केट भी खराब हाेता है। अल्मोड़ा से कॉल आती है कि दवा नहीं पहुंची, रानीखेत को राशन का इंतजार रहता है, द्वारहाट को सीमेंट और सरिया चाहिए होता है। सब परेशान और बेहाल हो जाते हैं। हल्द्वानी और आसपास के करीब 500 ट्रक एक दिन खड़े रहने से प्रतिदिन तीन हजार नुकसान के हिसाब से 15 लाख की आय घट जाती है।
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ट्रांसपोर्ट कारोबार हल्द्वानी शहर की रीढ़ है और टैक्स व अन्य आय के जरिये उत्तराखंड सरकार का खजाना भी भरते हैं। हाल के दो वर्षों में ट्रांसपोर्ट कारोबार सिमटता जा रहा है। इसका कारण हर माह 12 से 15 दिन तक पहाड़ों पर जाम और आए दिन वाहनों को रोकने की वजह है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के मुताबिक दो साल पहले तक रानीखेत, चौखटिया, द्वाराहाट, गैरसैंण तक जो ट्रक चलते थे, वे माह में 22 से 25 दिन तक लोड होते थे। यहां से लोड वाहन जाता था और वापस में खड़िया लेकर आता था। खड़िया पर रोक लगी तो ट्रकें खाली ही वापस आने लगे हैं।
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