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Nainital News: स्थानांतरण हो गया फिर भी नहीं छोड़ा आवास
Mon, 17 Mar 2025 01:47 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 17 Mar 2025 01:47 AM IST
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हल्द्वानी। स्थानांतरण दो तीन साल पहले हो गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टर के साथ ही काफी कर्मचारियों ने अब तक यहां आवास नहीं छोड़ा है। मेडिकल कॉलेज इनसे किसी प्रकार की रिकवरी भी नहीं कर पा रहा है। आवास खाली करने पर ही उनसे रिकवरी की गणना करते हुए संपत्ति एवं परियोजना अनुभाग की ओर से नो-ड्यूज फॉर्म में उसे अंकित किया जाता है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार आवास न छोड़ने वालों में फिजियोलॉजी, पिडियाट्रिक्स, गायनी, फॉरेंसिक मेडिसिन, पैथोलॉजी और जनरल मेडिसिन के करीब आठ डॉक्टर और आठ पूर्व नर्सिंग अधिकारी भी शामिल हैं। उनका 2021 और 2022 में ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन मेडिकल कॉलेज का परिसंपत्ति विभाग इनसे की जाने वाली रिकवरी की गणना नहीं कर सका है। इन सालों में इनका किराया बकाया बढ़ चुका है। यही नहीं कुछ के पुराने कार्यालयों पर उनके ही बोर्ड टंगे हुए हैं और चैंबर पर नेमप्लेट तक लगी हैं।
वरिष्ठ सहायक परिसंपत्ति विभाग मनोज चौधरी के अनुसार शासनादेश में प्रावधान है कि स्थानांतरण के बाद दो माह का समय मिलता है और इस अवधि में नोड्यूज सर्टिफिकेट हासिल कर लिया जाता है। लेकिन यहां सालों हो गए हैं। दो माह के बाद सामान्य चार्ज और उसके बाद हर महीने के हिसाब से दो-तीन गुना यह बकाया बढ़ता जाता है।
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36 विभागों से लेना पड़ती है अनापत्ति
नोड्यूज सर्टिफिकेट के लिए करीब 36 विभागों से अनापत्ति लेना पड़ती है। स्थानांतरित होने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों की अलमारियों में कॉलेज प्रशासन से संबंधित कागजात भी रखे हुए हैं, वे भी अब तक हैंडओवर नहीं हुए हैं। इन्हें सौंपने पर अनापत्ति मिलेगी और सभी विभागों से अनापत्ति के बाद ही सर्टिफिकेट जारी होगा।
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जिन लोगों के स्थानांतरण हुए हैं, उन्हें अभी वर्तमान तैनाती वाली जगहों पर आवास नहीं मिले हैं। एक जगह तो परिवार के रहने के लिए आवास चाहिए ही होता है। सभी को नोड्यूज सर्टिफिकेट पाने के लिए पत्र भेजा गया है। -डाॅ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी।
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आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार आवास न छोड़ने वालों में फिजियोलॉजी, पिडियाट्रिक्स, गायनी, फॉरेंसिक मेडिसिन, पैथोलॉजी और जनरल मेडिसिन के करीब आठ डॉक्टर और आठ पूर्व नर्सिंग अधिकारी भी शामिल हैं। उनका 2021 और 2022 में ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन मेडिकल कॉलेज का परिसंपत्ति विभाग इनसे की जाने वाली रिकवरी की गणना नहीं कर सका है। इन सालों में इनका किराया बकाया बढ़ चुका है। यही नहीं कुछ के पुराने कार्यालयों पर उनके ही बोर्ड टंगे हुए हैं और चैंबर पर नेमप्लेट तक लगी हैं।
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वरिष्ठ सहायक परिसंपत्ति विभाग मनोज चौधरी के अनुसार शासनादेश में प्रावधान है कि स्थानांतरण के बाद दो माह का समय मिलता है और इस अवधि में नोड्यूज सर्टिफिकेट हासिल कर लिया जाता है। लेकिन यहां सालों हो गए हैं। दो माह के बाद सामान्य चार्ज और उसके बाद हर महीने के हिसाब से दो-तीन गुना यह बकाया बढ़ता जाता है।
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36 विभागों से लेना पड़ती है अनापत्ति
नोड्यूज सर्टिफिकेट के लिए करीब 36 विभागों से अनापत्ति लेना पड़ती है। स्थानांतरित होने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों की अलमारियों में कॉलेज प्रशासन से संबंधित कागजात भी रखे हुए हैं, वे भी अब तक हैंडओवर नहीं हुए हैं। इन्हें सौंपने पर अनापत्ति मिलेगी और सभी विभागों से अनापत्ति के बाद ही सर्टिफिकेट जारी होगा।
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जिन लोगों के स्थानांतरण हुए हैं, उन्हें अभी वर्तमान तैनाती वाली जगहों पर आवास नहीं मिले हैं। एक जगह तो परिवार के रहने के लिए आवास चाहिए ही होता है। सभी को नोड्यूज सर्टिफिकेट पाने के लिए पत्र भेजा गया है। -डाॅ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी।