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योजना बनाने में कल का नहीं रखा ख्याल, पेयजल संकट झेल रही आवाम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2022 11:48 PM IST
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Tomorrow was not taken care of in planning, people facing drinking water crisis
हल्द्वानी। सरकारी विभाग की अदूरदर्शिता लोगों पर भारी पड़ रही है। जल संस्थान ने पेयजल समस्या के समाधान के लिए तात्कालिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के हिसाब से योजना का खाका खींच और योजना पूरी कर दी, पर आने वाले समय में आबादी बढ़ने का अनुमान नहीं लगाया। ऐसे में जैसे ही आबादी बढ़ी तो पेयजल संकट गहराने लगा। आलम यह है कि दो दशक से अधिक पुरानी पेयजल लाइनों से ही जैसे-तैसे आपूर्ति की जा रही है।
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जल संस्थान हो या फिर जल निगम पुरानी प्रणाली को छोड़ने और बदलने को तैयार नहीं है। बीस साल पहले पानी सप्लाई के लिए जो एक इंच की पाइप लाइन शहर भर में बिछाई गई थी आज भी शहर के ज्यादातर इलाकों में उसी पाइप लाइन से पानी की सप्लाई की जा रही है जिन क्षेत्रों में पाइप लाइन बदली गई वहां पुरानी पाइप लाइन को बंद ही नहीं किया गया। शहर में पानी पाइप लाइन का ऐसा जाल फैला है कि खराबी आने पर मुख्य बिंदु को पहचानने में ही कई दिन लग जाते हैं। अधिशासी अभियंता एसके श्रीवास्तव ने बताया कि पुरानी पाइप लाइनों के साथ एक ही क्षेत्र में नई पाइप लाइनें भी संचालित हैं। एई रविंद्र कुमार के मुताबिक नगरीय क्षेत्र में करीब 200 से 300 किमी तक पुरानी पाइप लाइनें बिछी हुई हैं। वहीं अगर बात करें ग्रामीण क्षेत्र की तो एई रमाशंकर विश्वकर्मा के मुताबिक तकरीबन 1250 किमी पाइप लाइन ग्रामीण क्षेत्र में बिछी हुई है। ये पाइप लाइनें आधा इंच, सवा इंच और एक इंच की हैं जिनकी वजह से पानी के प्रेशर में भी दिक्कतें आती हैं। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त प्वाइंट को ढूंढने में समय लगता और कभी-कभी उनकी रिपेयरिंग में भी दिक्कत आती है, जिसकी वजह से लोगों को दिक्कत होती है।
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आबादी के साथ-साथ नहीं बढ़ाए गए स्रोत और साधन
बीस साल पहले जब शहर और उसके ऊपर की तरफ बसे क्षेत्रों को पानी सप्लाई देने का कार्य शुरू किया गया तब शहर की आबादी तकरीबन दो से ढाई लाख के आसपास आंकी गई थी। उस समय पानी सप्लाई की व्यवस्था उस आबादी के मुताबिक की गई लेकिन भविष्य में बढ़ने वाली आबादी को दर किनार कर दिया गया और वर्तमान परिस्थितियों को ही अहमियत दी गई। इसका खामियाजा आज पूरा शहर भुगत रहा है। समय के साथ आबादी बढ़ी लेकिन न ही स्रोतों को बढ़ाया गया और न ही साधनों को।
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वाटर लेवल 200 मीटर पर पहुंचा
वर्तमान में वाटर लेवल इतना नीचे पहुंच गया है कि पानी खींचने के लिए लगी नलकूप की मोटरें भी दम तोड़ती दिखाई दे रही हैं। जल संस्थान के एई (ग्रामीण) रमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 35 सिंचाई विभाग के ट्यूबवेल और करीब 9 विभागीय ट्यूबवेल संचालित हैं। इसके साथ ही तकरीबन 12 ओवरहेड टैंक भी हैं जिनसे पानी स्टोर होकर घरों तक सप्लाई किया जाता है। बताया कि वर्तमान में वाटर लेवल करीब 105 मीटर से 120 मीटर तक पहुंच गया है। शहरी क्षेत्र में वाटर लेवल 145 से 165 मीटर तक पहुंच गया है।
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सर्वाधिक जल संकट वाले क्षेत्र
बरेली रोड, रामपुर रोड और नैनीताल रोड पर जल संकट की समस्या बनी रहती है। कहीं एक साल से पानी सप्लाई बाधित है तो कहीं सप्ताह भर से। बरेली रोड के जोशी विहार, गणपति विहार समेत कई इलाके ऐसे हैं, जहां पानी सप्लाई बाधित होने के साथ-साथ जिन इलाकों में पानी सुचारू है भी वहां लीकेज की भरमार है। वहीं नैनीताल रोड पर भी तिकोनिया समेत कई कॉलोनियों में पानी सप्लाई ठप चल रही है। इनमें जगदंबा नहर, सर्वशक्ति विहार के साथ-साथ कई कॉलोनियां शामिल हैं।

---वर्जन---
पुरानी व्यवस्था में धीरे-धीरे बदलाव किया जा रहा है। वर्तमान में जल जीवन मिशन के तहत भविष्य के 30 सालों में होने वाले विस्तार को ध्यान में रखकर योजना बनाई गई है। ताकि आगे आने वाले समय में लोगों को जल संकट से जूझना न पड़े।
-संजय श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान।
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