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-नैनीझील का जलस्तर घटना चिंताजनक
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Tue, 19 Apr 2016 10:32 PM IST
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नैनी झील
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीझील में जल भंडारण न होने के पीछे एक बड़ा कारण झील के कैचमेंट एरिया में पिछले दो-तीन दशकों में तेजी से वैध-अवैध रूप से निर्माण कार्य भी है। यही नहीं दो-तीन दशक पहले तक झील के चारों ओर पहाड़ियों में जो प्राकृतिक स्रोत थे, वह भी कंक्रीट के जंगलों में दब गए। नतीजा, वर्तमान में नैनीझील पानी को तरस रही है।
बताते चलें कि इस बार नैनीझील का जलस्तर तेजी से घटा है। इसका सीधा असर सरोवर नगरी के पर्यटक सीजन पर पड़ रहा है। पानी घटने के कारण नैनीझील के प्राकृतिक स्वरूप को देखने के लिए यहां पहुंचने वाले सैलानियों को झील अपने प्राकृतिक स्वरूप में नजर नहीं आ रही है। झील में पानी की कमी के बाबत पर्यावरणविद् डा. अजय रावत ने बताया कि सूखाताल नैनीझील का प्रमुख कैचमैंट क्षेत्र था। जहां पिछले दो-तीन दशकों में कई निर्माण कार्य हुए। निर्माण कार्यों से निकला मलबा कैचमेंट एरिया में फेंका गया। डा. रावत ने बताया कि पहले बरसात में सूखाताल पानी से लबालब रहती थी, लेकिन जब से वहां मकान बने हैं। प्रशासन बरसात में पंप लगाकर सूखाताल से पानी की निकासी करा देता है, जिसका असर नैनीझील में पड़ता है।
डा. रावत बताते हैं कि लगभग तीन दशक पहले तक झील के चारों ओर की पहाड़ियों में कई प्राकृतिक स्रोत थे। जो अब नहीं हैं। इन स्रोतों के ऊपर और आसपास कई आलीशान कोठियां बन चुकी हैं। प्राकृतिक स्रोतों से ऊपर हुए निर्माण कार्य खतरनाक हैं। यदि कभी तेज बरसात में प्राकृतिक स्रोत रिचार्ज हो गए तो इन भवनों को ध्वस्त होते देर नहीं लगेगी। यदि समय रहते झील के कैचमेंट एरिया को सुरक्षित और पुराने स्वरूप में न रखा गया तो वह दिन दूर नहीं जब नैनीझील की स्थिति और भी बदतर नजर आएगी।
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बताते चलें कि इस बार नैनीझील का जलस्तर तेजी से घटा है। इसका सीधा असर सरोवर नगरी के पर्यटक सीजन पर पड़ रहा है। पानी घटने के कारण नैनीझील के प्राकृतिक स्वरूप को देखने के लिए यहां पहुंचने वाले सैलानियों को झील अपने प्राकृतिक स्वरूप में नजर नहीं आ रही है। झील में पानी की कमी के बाबत पर्यावरणविद् डा. अजय रावत ने बताया कि सूखाताल नैनीझील का प्रमुख कैचमैंट क्षेत्र था। जहां पिछले दो-तीन दशकों में कई निर्माण कार्य हुए। निर्माण कार्यों से निकला मलबा कैचमेंट एरिया में फेंका गया। डा. रावत ने बताया कि पहले बरसात में सूखाताल पानी से लबालब रहती थी, लेकिन जब से वहां मकान बने हैं। प्रशासन बरसात में पंप लगाकर सूखाताल से पानी की निकासी करा देता है, जिसका असर नैनीझील में पड़ता है।
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डा. रावत बताते हैं कि लगभग तीन दशक पहले तक झील के चारों ओर की पहाड़ियों में कई प्राकृतिक स्रोत थे। जो अब नहीं हैं। इन स्रोतों के ऊपर और आसपास कई आलीशान कोठियां बन चुकी हैं। प्राकृतिक स्रोतों से ऊपर हुए निर्माण कार्य खतरनाक हैं। यदि कभी तेज बरसात में प्राकृतिक स्रोत रिचार्ज हो गए तो इन भवनों को ध्वस्त होते देर नहीं लगेगी। यदि समय रहते झील के कैचमेंट एरिया को सुरक्षित और पुराने स्वरूप में न रखा गया तो वह दिन दूर नहीं जब नैनीझील की स्थिति और भी बदतर नजर आएगी।
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