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शाम ढलते ही टीम हुई तैयार, बाघ का बेसब्री से इंतजार
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समय : शाम 5:29 बजे
स्थान : रामनगर फतेहपुर रेंज के दमुवाढूंगा क्षेत्र का जंगल।
यहां पर आरओ केआर आर्या और डिप्टी रेंजर किशोर गोस्वामी समेत वन विभाग की टीम पहुंचती है और जहां पर बाघ को काबू करने के लिए ऑपरेशन चल रहा है, उस जंगल की तरफ टीम रवाना होती है। करीब एक किमी अंदर जाने पर मचान और कुछ लोग दिखाई देते हैं।
समय: 5: 40 बजे
स्थान: दमुवाढूंगा का जंगल
यहां पर संसाधनों से लैस एक टीम दिखाई देती है, जिसके पास आधुनिक उपकरण है। कुछ लोग पास पर बने मचान पर पहुंचकर पोजिशन लेना शुरू कर रहे होते हैं, मचान में सभी संसाधनों को पहुंचाने की कोशिश में एक टीम के सदस्य दिखाई देते हैं। बातचीत करने पर पता चलता है कि बाघ का जो व्यवहार है, उसका अध्ययन किया गया है, उसके हिसाब से रणनीति को तैयार की गई है। इसी के तहत कुछ ही देर में टीम मचान पर और अन्य टीम अपने कामकाज में जुट जाती है। अब बस उन्हें.... बाघ का इंतजार है, जिसका वे इसी तरह से कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं।
स्थान : फतेहपुर रेंज कार्यालय
समय : रात करीब 7 बजे
यहां पर जगह-जगह पर तैनात वनकर्मियों को खाना आदि पहुंचाने में टीम जुटी हैं। अन्य तैयारियां भी की जा रही हैं। यहां पर वन कर्मी योगेश जलाल और राजीव जोशी ऑपरेशन से जुड़ी तैयारियों में जुटे दिखाई देते हैं।
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चार मचान और 90 कैमरा ट्रैप रखी जा रही नजर
हल्द्वानी। रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज में दिसंबर से मार्च के बीच छह लोग वन्यजीव के हमले में मार जा चुके हैं। इसके बाद वन विभाग की टीम ने वृहद स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया है। इसमें मदद के लिए जामनगर चिड़ियाघर से तीस सदस्यों की टीम संसाधनों के साथ पहुंची है। तमाम कोशिशों के बाद भी बाघ न तो पकड़ा जा सका और न ही ठिकाने लगाया जा सका है।
वनाधिकारी बताते हैं कि कई रेंजों से करीब दो सौ वन कर्मियों आदि की टीम को तैनात किया गया है। बाघ को काबू करने के लिए वन विभाग के पशु चिकित्सकों की टीम भी तैनात है। लेकिन, अभी तक अभियान में सफलता नहीं मिली है।
रेंजर केआर आर्या बताते हैं कि रेंज में 90 कैमरा ट्रैप, पांच पिंजरे लगाए गए हैं। चार मचानों पर टीम भी तैनात हैं। पूरी कोशिश की जा रही है। सभी संसाधनों को लगाया गया है। वहीं, जामनगर चिड़ियाघर की टीम अपने संचार और सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्था के साथ पहुंची है।
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स्थान : रामनगर फतेहपुर रेंज के दमुवाढूंगा क्षेत्र का जंगल।
यहां पर आरओ केआर आर्या और डिप्टी रेंजर किशोर गोस्वामी समेत वन विभाग की टीम पहुंचती है और जहां पर बाघ को काबू करने के लिए ऑपरेशन चल रहा है, उस जंगल की तरफ टीम रवाना होती है। करीब एक किमी अंदर जाने पर मचान और कुछ लोग दिखाई देते हैं।
समय: 5: 40 बजे
स्थान: दमुवाढूंगा का जंगल
यहां पर संसाधनों से लैस एक टीम दिखाई देती है, जिसके पास आधुनिक उपकरण है। कुछ लोग पास पर बने मचान पर पहुंचकर पोजिशन लेना शुरू कर रहे होते हैं, मचान में सभी संसाधनों को पहुंचाने की कोशिश में एक टीम के सदस्य दिखाई देते हैं। बातचीत करने पर पता चलता है कि बाघ का जो व्यवहार है, उसका अध्ययन किया गया है, उसके हिसाब से रणनीति को तैयार की गई है। इसी के तहत कुछ ही देर में टीम मचान पर और अन्य टीम अपने कामकाज में जुट जाती है। अब बस उन्हें.... बाघ का इंतजार है, जिसका वे इसी तरह से कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं।
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स्थान : फतेहपुर रेंज कार्यालय
समय : रात करीब 7 बजे
यहां पर जगह-जगह पर तैनात वनकर्मियों को खाना आदि पहुंचाने में टीम जुटी हैं। अन्य तैयारियां भी की जा रही हैं। यहां पर वन कर्मी योगेश जलाल और राजीव जोशी ऑपरेशन से जुड़ी तैयारियों में जुटे दिखाई देते हैं।
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चार मचान और 90 कैमरा ट्रैप रखी जा रही नजर
हल्द्वानी। रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज में दिसंबर से मार्च के बीच छह लोग वन्यजीव के हमले में मार जा चुके हैं। इसके बाद वन विभाग की टीम ने वृहद स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया है। इसमें मदद के लिए जामनगर चिड़ियाघर से तीस सदस्यों की टीम संसाधनों के साथ पहुंची है। तमाम कोशिशों के बाद भी बाघ न तो पकड़ा जा सका और न ही ठिकाने लगाया जा सका है।
वनाधिकारी बताते हैं कि कई रेंजों से करीब दो सौ वन कर्मियों आदि की टीम को तैनात किया गया है। बाघ को काबू करने के लिए वन विभाग के पशु चिकित्सकों की टीम भी तैनात है। लेकिन, अभी तक अभियान में सफलता नहीं मिली है।
रेंजर केआर आर्या बताते हैं कि रेंज में 90 कैमरा ट्रैप, पांच पिंजरे लगाए गए हैं। चार मचानों पर टीम भी तैनात हैं। पूरी कोशिश की जा रही है। सभी संसाधनों को लगाया गया है। वहीं, जामनगर चिड़ियाघर की टीम अपने संचार और सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्था के साथ पहुंची है।