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Nainital News: बीएफआई के रिंग में गढ़ी एशियन में स्वर्ण की कहानी

Tue, 06 Oct 2026 12:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Tue, 06 Oct 2026 12:31 AM IST
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The story of the Asian gold medal forged in the BFI ring.
हल्द्वानी।
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22 महीने के खेल प्रतिबंध का दंश झेलने के बाद रिंग में लौटीं बॉक्सर परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की। मुश्किल दौर में कोच जोगेंद्र सोन उनके सारथी बने। संघर्ष, संयम और संकल्प की इस कहानी ने परवीन को मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन के बाद एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला बॉक्सर के रूप में नई पहचान दिलाई है।

सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के कोट-भल्दयो गांव निवासी आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडर और बॉक्सिंग कोच जोगेंद्र सोनी पंचकुला में तैनात हैं और वर्तमान में हल्द्वानी के बिठौरिया नंबर एक में रहते हैं। जोगेंद्र ने बताया कि परवीन को साल 2021 में आईटीबीपी में खेल कोटे में पंचकुला में तैनाती मिली। तब से परवीन को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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जोगेंद्र बताते हैं कि परवीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार थीं, लेकिन डोपिंग नियमों के तहत लगे प्रतिबंध ने उनके सपनों को झकझोर दिया। उस मुश्किल दौर में जोगेंद्र सिर्फ कोच नहीं, बल्कि परवीन की हिम्मत और हौसला बने।
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रिंग से देशसेवा तक, जोगेंद्र सोनी ने गढ़े चैंपियन

जोगेंद्र सोनी के पिता लक्ष्मण सिंह सोनी एसएसबी में थे, जबकि माता इंद्रा देवी गृहिणी थीं। जोगेंद्र ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई सहारनपुर तथा कॉलेज की शिक्षा पिथौरागढ़ से पूरी की। यहीं भारतीय बॉक्सिंग के पितामह कैप्टन हरि सिंह थापा से प्रेरित होकर उन्होंने बॉक्सिंग को करियर बनाया और चार साल तक उनसे प्रशिक्षण लिया। इस दौरान ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी और यूपी यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते।


1991 में खेल कोटे से आईटीबीपी में सिपाही के रूप में देशसेवा शुरू की। वर्ष 2004 में उन्हें बेस्ट कमांडर इंस्ट्रक्टर का खिताब मिला।



तालिबान आतंक को दी चुनौती
अफगानिस्तान में भारत सरकार की जारंज डेलाराम के तहत 218 किमी लंबे राजमार्ग निर्माण में तालिबान के आतंक को समाप्त करने के लिए वह गृह मंत्रालय की भेजी गई सेना का भी हिस्सा रहे। उन्होंने नवंबर 2005 से अगस्त 2008 तक योजना को पूरा कराने में योदान दिया।



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