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जंगल के पहरेदारों को मिल सकते हैं असलहे
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एक्सक्लूसिव
जंगल के पहरेदारों को मिल सकते हैं असलहे
बाघों को बचाने और वन कर्मियों की आत्मरक्षा के लिए सभी को हथियार देने की योजना
वनविभाग के पास बेहद कम हथियार, सालों से असलहों की खरीद भी नहीं हुई
विजेंद्र श्रीवास्तव
हल्द्वानी। प्रदेश में बाघों को बचाने और आत्मरक्षा के लिए पहली बार डीएफओ से लेकर फॉरेस्ट गार्ड तक, सभी को हथियार देने की तैयारी है। फॉरेस्ट गार्ड, वन दरोगा आदि को बाघ आदि की सुरक्षा के लिए इंसास राइफल देने के विकल्प को भी रखा गया है। एक टीम बनी है, जो सभी पहलुओं को देख रही है। इसके अलावा, अधिकारियों को रिवाल्वर उपलब्ध कराने की भी योजना है।
वन विभाग के पास असलहों की बेहद कमी है, जबकि विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को शिकारियों, लकड़ी तस्करों, अतिक्रमणकारियों, अवैध खनन करने वालों से निपटना पड़ता है। सालों से असलहों की कमी दूर करने की कोशिश चल रही है। अब नए सिरे से कोशिश शुरू हुई है।
टीम बनाई गई है : धकाते
हल्द्वानी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि वन विभाग के आधुनिकीकरण और इसे सशक्त करने की योजना पर कार्य शुरू किया गया है। फॉरेस्ट गार्डों की कमी थी, जिसे भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से काफी हद तक दूर किया गया है। साथ ही वनकर्मियों को आधुनिक हथियार और ट्रेनिंग देने की योजना पर काम शुरू किया गया है। फॉरेस्ट गार्ड, वन दरोगा आदि को इंसास राइफल देने की योजना है जबकि रेंजर, एसडीओ, डीएफओ को रिवाल्वर देने की योजना है। सभी फील्ड स्टाफ को हथियार दिए जाएंगे। इंसास राइफल उपलब्ध कराने से जुडे़ सभी पहलुओं को देखने के लिए एक टीम भी बन चुकी है। इसमें मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल व अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम पुलिस विभाग का सहयोग लेते हुए सभी बिंदुओं पर अपना पक्ष प्रमुख वन संरक्षक के समक्ष रखेगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
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कोट
‘वन कर्मियों को हथियार उपलब्ध कराए जाने हैं, जिसमें इंसास राइफल, पंप एक्शन गन आदि विकल्पों को भी रखा गया है। सभी पहलुओं को देखने के बाद ही अंतिम निर्णय उच्चाधिकारियों की ओर से लिया जाएगा।’- सुशांत पटनायक, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल
‘कुमाऊं के डिविजन में हाल ही में नए फॉरेस्ट गार्ड मिले हैं। अब सभी को हथियार उपलब्ध होने से सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता करने में मदद मिल सकेगी।’ -डॉ. तेजस्विनी पाटिल, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं
कुमाऊं में जंगलात के पास असलहों की स्थिति
हल्द्वानी। वन विभाग के कुमाऊं डिविजन के पास 12 बोर की 121 बंदूकें, 151 राइफलें हैं। कुछ पंप एक्शन गन भी हैं। इनमें भी सबसे अधिक वेस्टर्न सर्किल (कुमाऊं के पांच तराई के डिविजन आते हैं, जहां घटनाओं की संख्या अधिक रहती है) पंप एक्शन गन खरीद भी तराई केंद्रीय वन प्रभाग में आदि में भी पंप एक्शन गन की खरीद 14 साल पहले तत्कालीन डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते के समय हुई थी। अभी जो योजना है, उसमें सभी को असलहे मिल सकेंगे।
निजी लाइसेंस पर हथियार लिए
हल्द्वानी। कई वन कर्मियों ने सुरक्षा के चलते निजी लाइसेंस पर हथियार लिए हैं। इसमें रिवाल्वर व राइफल शामिल हैं।
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जंगल के पहरेदारों को मिल सकते हैं असलहे
बाघों को बचाने और वन कर्मियों की आत्मरक्षा के लिए सभी को हथियार देने की योजना
वनविभाग के पास बेहद कम हथियार, सालों से असलहों की खरीद भी नहीं हुई
विजेंद्र श्रीवास्तव
हल्द्वानी। प्रदेश में बाघों को बचाने और आत्मरक्षा के लिए पहली बार डीएफओ से लेकर फॉरेस्ट गार्ड तक, सभी को हथियार देने की तैयारी है। फॉरेस्ट गार्ड, वन दरोगा आदि को बाघ आदि की सुरक्षा के लिए इंसास राइफल देने के विकल्प को भी रखा गया है। एक टीम बनी है, जो सभी पहलुओं को देख रही है। इसके अलावा, अधिकारियों को रिवाल्वर उपलब्ध कराने की भी योजना है।
वन विभाग के पास असलहों की बेहद कमी है, जबकि विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को शिकारियों, लकड़ी तस्करों, अतिक्रमणकारियों, अवैध खनन करने वालों से निपटना पड़ता है। सालों से असलहों की कमी दूर करने की कोशिश चल रही है। अब नए सिरे से कोशिश शुरू हुई है।
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टीम बनाई गई है : धकाते
हल्द्वानी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि वन विभाग के आधुनिकीकरण और इसे सशक्त करने की योजना पर कार्य शुरू किया गया है। फॉरेस्ट गार्डों की कमी थी, जिसे भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से काफी हद तक दूर किया गया है। साथ ही वनकर्मियों को आधुनिक हथियार और ट्रेनिंग देने की योजना पर काम शुरू किया गया है। फॉरेस्ट गार्ड, वन दरोगा आदि को इंसास राइफल देने की योजना है जबकि रेंजर, एसडीओ, डीएफओ को रिवाल्वर देने की योजना है। सभी फील्ड स्टाफ को हथियार दिए जाएंगे। इंसास राइफल उपलब्ध कराने से जुडे़ सभी पहलुओं को देखने के लिए एक टीम भी बन चुकी है। इसमें मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल व अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम पुलिस विभाग का सहयोग लेते हुए सभी बिंदुओं पर अपना पक्ष प्रमुख वन संरक्षक के समक्ष रखेगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
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‘वन कर्मियों को हथियार उपलब्ध कराए जाने हैं, जिसमें इंसास राइफल, पंप एक्शन गन आदि विकल्पों को भी रखा गया है। सभी पहलुओं को देखने के बाद ही अंतिम निर्णय उच्चाधिकारियों की ओर से लिया जाएगा।’- सुशांत पटनायक, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल
‘कुमाऊं के डिविजन में हाल ही में नए फॉरेस्ट गार्ड मिले हैं। अब सभी को हथियार उपलब्ध होने से सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता करने में मदद मिल सकेगी।’ -डॉ. तेजस्विनी पाटिल, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं
कुमाऊं में जंगलात के पास असलहों की स्थिति
हल्द्वानी। वन विभाग के कुमाऊं डिविजन के पास 12 बोर की 121 बंदूकें, 151 राइफलें हैं। कुछ पंप एक्शन गन भी हैं। इनमें भी सबसे अधिक वेस्टर्न सर्किल (कुमाऊं के पांच तराई के डिविजन आते हैं, जहां घटनाओं की संख्या अधिक रहती है) पंप एक्शन गन खरीद भी तराई केंद्रीय वन प्रभाग में आदि में भी पंप एक्शन गन की खरीद 14 साल पहले तत्कालीन डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते के समय हुई थी। अभी जो योजना है, उसमें सभी को असलहे मिल सकेंगे।
निजी लाइसेंस पर हथियार लिए
हल्द्वानी। कई वन कर्मियों ने सुरक्षा के चलते निजी लाइसेंस पर हथियार लिए हैं। इसमें रिवाल्वर व राइफल शामिल हैं।