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चांदनी चौक गरवाल के जंगल धधके
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हल्द्वानी। रामपुर रोड पर चांदनी चौक गरवाल के जंगल में शुक्रवार शाम फिर आग लग गई। फायर ब्रिगेड की टीम और ग्रामीणों के घंटों प्रयास के बाद आग पर काबू किया गया। आग बुझाने में फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां लगी रहीं।
चांदनी चौक गरवाल के ग्राम प्रधान देवेंद्र परगाई ने बताया कि जंगल में आग लगने की सूचना देने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और पुलिसकर्मी आ गए। ग्रामीणों ने पानी के निजी टैंकरों को भी आग बुझाने में लगाया। आग को फैलने से रोकने के लिए ग्रामीणों ने जमकर पसीना बहाया। ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड के प्रयास से रात साढ़े आठ बजे तक आग को काबू में कर लिया गया। ग्राम प्रधान परगाई का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता से आग गांव तक नहीं पहुंच सकी। बता दें कि बृहस्पतिवार को भी गांव में वनाग्नि आबादी तक पहुंच गई थी, जिससे गेहूं की फसल जल गई थी। उधर कमलुवागांजा स्थित एक खेत में आग लगी थी, जिसे ग्रामीणों ने बुझा लिया था।
मार्च में 33 स्थानों पर लगी थी आग
अग्निशमन विभाग के अनुसार मार्च में 33 स्थानों पर अग्निकांड की घटनाएं हुई। आग फैलने से फसलें और 120 झोपड़ियां जलकर नष्ट हो गई। गौला नदी क्षेत्र में सौ से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गई थी। इस बीच दो शोरूम में भी आग लगी थी। अप्रैल की शुरुआत से वनाग्नि के विकराल रूप लेने पर कर्मचारियों के पसीने छूट गए हैं।
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चांदनी चौक गरवाल के ग्राम प्रधान देवेंद्र परगाई ने बताया कि जंगल में आग लगने की सूचना देने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और पुलिसकर्मी आ गए। ग्रामीणों ने पानी के निजी टैंकरों को भी आग बुझाने में लगाया। आग को फैलने से रोकने के लिए ग्रामीणों ने जमकर पसीना बहाया। ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड के प्रयास से रात साढ़े आठ बजे तक आग को काबू में कर लिया गया। ग्राम प्रधान परगाई का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता से आग गांव तक नहीं पहुंच सकी। बता दें कि बृहस्पतिवार को भी गांव में वनाग्नि आबादी तक पहुंच गई थी, जिससे गेहूं की फसल जल गई थी। उधर कमलुवागांजा स्थित एक खेत में आग लगी थी, जिसे ग्रामीणों ने बुझा लिया था।
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मार्च में 33 स्थानों पर लगी थी आग
अग्निशमन विभाग के अनुसार मार्च में 33 स्थानों पर अग्निकांड की घटनाएं हुई। आग फैलने से फसलें और 120 झोपड़ियां जलकर नष्ट हो गई। गौला नदी क्षेत्र में सौ से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गई थी। इस बीच दो शोरूम में भी आग लगी थी। अप्रैल की शुरुआत से वनाग्नि के विकराल रूप लेने पर कर्मचारियों के पसीने छूट गए हैं।
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