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देश का पहला स्टेडियम, जहां दिव्यांगों का खास ख्याल

Mon, 19 Dec 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल।
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल। Updated Mon, 19 Dec 2016 01:52 AM IST
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The first stadium in the country where the care divyangom
स्टेडियम - फोटो : अमर उजाला
 अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खिलाड़ियों, सामान्य दर्शकों के अलावा दिव्यांगों का भी खास ख्याल रखा गया है। स्टेडियम के अंदर पहुंचने और बैठने के लिए खास व्यवस्था की गई है। दिव्यांग दर्शकों को सबसे आगे की पंक्ति भी दी गई है। स्टेडियम के आर्किटेक्ट राम कुमार का दावा है कि यह देश का पहला स्टेडियम है, जहां पर एक हजार दिव्यांगों के एक साथ बैठने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा डे-नाइट मैच के लिए छह महीने के अंदर फ्लड लाइट लगाने की भी योजना है। 
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अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में दर्शकों के बैठने की शुरुआती क्षमता 10 हजार है। इसमें दिव्यांग दर्शकों के लिए स्टेडियम के अंदर पहुंचाने के लिए अलग से गेट और रैंप की व्यवस्था की गई है। दिव्यांगों के लिए आगे की पंक्ति भी आरक्षित की गई है। जहां वे आसानी से बैठ सकते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कई स्टेडियमों में आगे की तरफ बैरीकेडिंग लगाई जाती है, ताकि उत्साहित दर्शक कूदकर ग्राउंड में पहुंच न पहुंच जाएं। पर यहां स्टेडियम की सीटिंग व्यवस्था और मैदान के बीच ऊंचाई बढ़ाई गई है, जिससे कूदकर पहुंचना मुश्किल होगा। इसके चलते अभी बैरीकेडिंग नहीं लगाने का फैसला किया गया है। निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों के मुताबिक इससे मैच का दृश्य भी खराब नहीं होगा। आईसीसी के मानकों के हिसाब पांच विभिन्न कोण पर कैमरे लगाने की सुविधा समेत तमाम मानकों का ध्यान रखा गया है। इसके अंदर पांच पिचें होंगी, जिसमें मैच होने पर लंबाई, चौड़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 
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धर्मशाला को टक्कर देगा हल्द्वानी का स्टेडियम
हल्द्वानी का स्टेडियम देश के खूबसूरत स्टेडियम में शुमार धर्मशाला के स्टेडियम को हर लिहाज से टक्कर देगा। हल्द्वानी स्टेडियम धर्मशाला की तर्ज पर ही बना लगता है। यहां पर भी वहां की तरह ही खूबसूरत पहाड़ हैं। चारों तरफ हरियाली है। धर्मशाला स्टेडियम की तरह इसकी दर्शकों के बैठने की क्षमता भी कमोबेश समान ही है। इसके अलावा जो हल्द्वानी स्टेडियम के लिए खास है वह है बगल में ही बहने वाली गौला नदी। कुमाऊं की इस वर्ष की बड़ी उपलब्धियों और मेगा प्रोजेक्ट की बात करें तो गौलापार बना स्टेडियम सबसे बड़ी उपलब्धि है। 
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