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उधारी से चल रही जिंदगी की गाड़ी
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हल्द्वानी। रायल्टी देने के बाद गौला से निकलने वाला खनिज डंपर स्वामी किसी भी स्टोन क्रशर में बेच सकता था। जनवरी में व्यवस्था में बदलाव कर स्टोन क्रशरों की खरीद और भंडारण क्षमता दोनों तय कर दी गई है। ऐसे में कई स्टोन क्रशरों ने तय क्षमता पूरी होने के बाद खनिज खरीद को बंद कर दिया है। इसके चलते डंपर स्वामियों को खनिज बिक्री में समस्या आ रही है और श्रमिकों के पास काम नहीं है। उन्हें जैसे-तैसे उधार से काम चलाना पड़ रहा है।
गौला नदी में सबसे बड़ा खनन कार्य होता है। व्यवस्था के तहत 11 गेटों से करीब 7500 वाहनों से खनिज निकासी होती है। अब खनिज निकासी प्रभावित हुई है। हालत यह है कि पांच मार्च को पंजीकृत करीब सात हजार पांच हजार वाहनों की तुलना में 5615 वाहनों से निकासी हुई है। काम प्रभावित होने से डंपर स्वामियों के सामने चालक-क्लीनर के वेतन, वाहन के हर साल इंश्योरेंस, टैक्स आदि को लेकर चिंता है। उनका कहना है कि खनिज खरीदने के लिए सभी स्टोन क्रशर स्वामियों को पहले जैसी व्यवस्था लागू किया जाए।
श्रमिकों की पीड़ा
हल्द्वानी। मोतिहारी बिहार से खनिज ढुलान करने पहुंचे श्रमिक लईक अहमद और रूपनराम कहते हैं कि कई दिनों से कोई काम नहीं है। उधारी में राशन खरीद रहे हैं। बिलासपुर से हमशीर अली, मुरादाबाद के शौकीन अहमद कहते हैं कि रोजी रोटी का संकट आ गया है। मुरादाबाद जिले के नन्हें कहते हैं कि सात दिन में केवल तीन दिन काम मिल सका था।
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डंपर स्वामी मुश्किल में
हल्द्वानी। गौला खनन संघर्ष समिति के सचिव और डंपर स्वामी पम्मी सैफी कहते हैं कि कई स्टोन क्रशरों ने खरीद बंद कर दी है, तो डंपर स्वामी के सामने उसे बेचने की समस्या है। यही हालत रही तो श्रमिक लौटने लगेंगे। मो. इरफान कहते हैं कि जब नदी चल रही होती है, तो उधार लेकर भी कर्मियों का खर्चा, श्रमिकों का भुगतान कर दिया जाता है। बाद में खनिज मूल्य मिलने पर उधार चुका दिया जाता है। मो. उमर के अनुसार खर्चा निकालना तक मुश्किल हो गया है।
रामनगर में खनन का लक्ष्य पूरा
रामनगर (नैनीताल)। कोसी व दाबका नदी में खनन का लक्ष्य पूरा हो चुका है। डीएलएम धीरेश चंद्र बिष्ट ने बताया कि इस वर्ष कोसी नदी में खनन का लक्ष्य चार लाख 69 हजार घनमीटर और दाबका नदी में 63 हजार 837 घनमीटर था। दोनों नदियों में नदियों में खनन का लक्ष्य पूरा हो चुका है। फरवरी में राज्य रिप्लेसमेंट स्टडी टीम ने कोसी व दाबका नदी में सर्वे किया है। सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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गौला नदी में सबसे बड़ा खनन कार्य होता है। व्यवस्था के तहत 11 गेटों से करीब 7500 वाहनों से खनिज निकासी होती है। अब खनिज निकासी प्रभावित हुई है। हालत यह है कि पांच मार्च को पंजीकृत करीब सात हजार पांच हजार वाहनों की तुलना में 5615 वाहनों से निकासी हुई है। काम प्रभावित होने से डंपर स्वामियों के सामने चालक-क्लीनर के वेतन, वाहन के हर साल इंश्योरेंस, टैक्स आदि को लेकर चिंता है। उनका कहना है कि खनिज खरीदने के लिए सभी स्टोन क्रशर स्वामियों को पहले जैसी व्यवस्था लागू किया जाए।
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श्रमिकों की पीड़ा
हल्द्वानी। मोतिहारी बिहार से खनिज ढुलान करने पहुंचे श्रमिक लईक अहमद और रूपनराम कहते हैं कि कई दिनों से कोई काम नहीं है। उधारी में राशन खरीद रहे हैं। बिलासपुर से हमशीर अली, मुरादाबाद के शौकीन अहमद कहते हैं कि रोजी रोटी का संकट आ गया है। मुरादाबाद जिले के नन्हें कहते हैं कि सात दिन में केवल तीन दिन काम मिल सका था।
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डंपर स्वामी मुश्किल में
हल्द्वानी। गौला खनन संघर्ष समिति के सचिव और डंपर स्वामी पम्मी सैफी कहते हैं कि कई स्टोन क्रशरों ने खरीद बंद कर दी है, तो डंपर स्वामी के सामने उसे बेचने की समस्या है। यही हालत रही तो श्रमिक लौटने लगेंगे। मो. इरफान कहते हैं कि जब नदी चल रही होती है, तो उधार लेकर भी कर्मियों का खर्चा, श्रमिकों का भुगतान कर दिया जाता है। बाद में खनिज मूल्य मिलने पर उधार चुका दिया जाता है। मो. उमर के अनुसार खर्चा निकालना तक मुश्किल हो गया है।
रामनगर में खनन का लक्ष्य पूरा
रामनगर (नैनीताल)। कोसी व दाबका नदी में खनन का लक्ष्य पूरा हो चुका है। डीएलएम धीरेश चंद्र बिष्ट ने बताया कि इस वर्ष कोसी नदी में खनन का लक्ष्य चार लाख 69 हजार घनमीटर और दाबका नदी में 63 हजार 837 घनमीटर था। दोनों नदियों में नदियों में खनन का लक्ष्य पूरा हो चुका है। फरवरी में राज्य रिप्लेसमेंट स्टडी टीम ने कोसी व दाबका नदी में सर्वे किया है। सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।