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गांवों में भी मकान बनाना होगा और महंगा, नक्शा पास कराना जरूरी
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चंपावत। शहरों की अपेक्षा गांवों में मकान बनाना पहले से ही महंगा था लेकिन अब ये बोझ और बढ़ने वाला है। गांवों में भवन निर्माण से पूर्व नक्शा पास कराना भविष्य में अनिवार्य हो सकता है। जिला पंचायत ने इससे संबंधित प्रस्ताव रखा है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद ये नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। ऐसा होने पर नक्शा पास कराए बिना व्यावसायिक भवन और उद्योगों के भवनों का निर्माण भी नहीं कराया सकेगा।
गांवों में महंगे ढुलान की वजह से मकान बनाने में शहरों से दस प्रतिशत से ज्यादा लागत आती है। अब गांवों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। जिला पंचायत ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय मकान के साथ ही व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों का निर्माण कराने के लिए भी नक्शे पास कराना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए शुल्क तय किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रस्ताव को अनुमोदित करने से गांवों में मकान बनाना महंगा हो जाएगा।
इस प्रस्ताव के लागू होने से जिला पंचायत का खजाना तो भरेगा लेकिन लोगों की जेब ढीली होगी। जिले की 313 ग्राम पंचायतों में ही सालभर में औसतन 1095 मकानों का निर्माण होता है। व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों का निर्माण अलग है।
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विनियमित क्षेत्र में डीडीए पास कर चुका है 232 भवन के नक्शे
चंपावत। जिले में फिलहाल सिर्फ विनियमित क्षेत्र चंपावत और आसपास के कुछ क्षेत्रों में ही चंपावत जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) से नक्शा पास कराना अनिवार्य है। एडीएम हेमंत कुमार वर्मा का कहना है कि वर्ष 2016 से शुरू इस व्यवस्था में डीडीए ने 272 नक्शों में से 232 भवनों के नक्शे पास किए हैं जबकि 27 नक्शे खारिज हुए हैं और 13 विचाराधीन हैं। नक्शा पास कराने से पहले प्राधिकरण विकास शुल्क, उप विभाजन, पर्यवेक्षण शुल्क, श्रम उपकर वसूलता है। प्राधिकरण 1.13 करोड़ रुपये का शुल्क वसूल चुका है।
ये है प्रस्तावित दर
भवन की श्रेणी शुल्क (रुपये में)
निजी भवन (एक हजार वर्ग फीट तक): तीन हजार
निजी भवन (एक हजार वर्ग फीट से ज्यादा): चार हजार
व्यवसाय/उद्योग के लिए भवन (एक हजार वर्ग फीट तक): पांच हजार
व्यवसाय/उद्योग के लिए भवन (एक हजार वर्ग फीट तक): आठ हजार
गांवों में भवन निर्माण, व्यावसायिक, लघु उद्योगों के भवन के लिए शुल्क का प्रस्ताव रखा गया है लेकिन अभी इसे लगाया नहीं गया है। प्रस्ताव पर 18 जून तक आपत्ति की जा सकती है। शासन से स्वीकृति के बाद शासकीय गजट में प्रकाशित होने की तिथि से यह व्यवस्था लागू होगी। इससे जिला पंचायत गांवों को अधिक सुविधा दे सकेगी। जिला पंचायत की आमदनी भी बढ़ेगी। - भगवत पाटनी, अपर मुख्य अधिकारी, चंपावत।
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गांवों में महंगे ढुलान की वजह से मकान बनाने में शहरों से दस प्रतिशत से ज्यादा लागत आती है। अब गांवों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। जिला पंचायत ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय मकान के साथ ही व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों का निर्माण कराने के लिए भी नक्शे पास कराना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए शुल्क तय किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रस्ताव को अनुमोदित करने से गांवों में मकान बनाना महंगा हो जाएगा।
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इस प्रस्ताव के लागू होने से जिला पंचायत का खजाना तो भरेगा लेकिन लोगों की जेब ढीली होगी। जिले की 313 ग्राम पंचायतों में ही सालभर में औसतन 1095 मकानों का निर्माण होता है। व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों का निर्माण अलग है।
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विनियमित क्षेत्र में डीडीए पास कर चुका है 232 भवन के नक्शे
चंपावत। जिले में फिलहाल सिर्फ विनियमित क्षेत्र चंपावत और आसपास के कुछ क्षेत्रों में ही चंपावत जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) से नक्शा पास कराना अनिवार्य है। एडीएम हेमंत कुमार वर्मा का कहना है कि वर्ष 2016 से शुरू इस व्यवस्था में डीडीए ने 272 नक्शों में से 232 भवनों के नक्शे पास किए हैं जबकि 27 नक्शे खारिज हुए हैं और 13 विचाराधीन हैं। नक्शा पास कराने से पहले प्राधिकरण विकास शुल्क, उप विभाजन, पर्यवेक्षण शुल्क, श्रम उपकर वसूलता है। प्राधिकरण 1.13 करोड़ रुपये का शुल्क वसूल चुका है।
ये है प्रस्तावित दर
भवन की श्रेणी शुल्क (रुपये में)
निजी भवन (एक हजार वर्ग फीट तक): तीन हजार
निजी भवन (एक हजार वर्ग फीट से ज्यादा): चार हजार
व्यवसाय/उद्योग के लिए भवन (एक हजार वर्ग फीट तक): पांच हजार
व्यवसाय/उद्योग के लिए भवन (एक हजार वर्ग फीट तक): आठ हजार
गांवों में भवन निर्माण, व्यावसायिक, लघु उद्योगों के भवन के लिए शुल्क का प्रस्ताव रखा गया है लेकिन अभी इसे लगाया नहीं गया है। प्रस्ताव पर 18 जून तक आपत्ति की जा सकती है। शासन से स्वीकृति के बाद शासकीय गजट में प्रकाशित होने की तिथि से यह व्यवस्था लागू होगी। इससे जिला पंचायत गांवों को अधिक सुविधा दे सकेगी। जिला पंचायत की आमदनी भी बढ़ेगी। - भगवत पाटनी, अपर मुख्य अधिकारी, चंपावत।