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साहित्यकारों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं : कुंजवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, भवाली
Updated Sun, 10 May 2015 02:12 AM IST
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विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि रामगढ़ का क्षेत्र रविंद्र नाथ टैगोर समेत कई साहित्यकारों की कर्मस्थली रही है। मौजूदा समय में उनसे जुड़ी स्मृतियों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। कुंजवाल शनिवार को रामगढ़ स्थित वृंदावन आचर्ड में रविंद्र नाथ टैगोर की155वीं जयंती पर आयोजित तीन दिनी महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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हिमालयन एजुकेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी (हर्डस) और स्थानीय लोगों की पहल पर आयोजित कार्यक्रम में कुंजवाल ने गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर के स्मृति चिन्हों में से एक टैगोर हिल एवं उससे जुड़े अन्य स्थलों को संरक्षित करने के हर्ड्स के प्रयासों की सराहना की। विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. एचएस धामी ने रवींद्रनाथ टैगोर को महान चित्रकार, दार्शनिक, कवि, साहित्यकार और समाजसेवी बताते हुए लोगों से आह्वान किया कि वे उनके दर्शन के अनुरूप अपने जीवन को बनाएं। जलागम प्रबंध उपाध्यक्ष दिनेश कुंजवाल ने टैगोर हिल के संरक्षण पर जोर दिया।
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महोत्सव के आयोजक सचिव प्रो. अतुल जोशी ने जयंती महोत्सव के उद्देश्य और भावी योजना के बारे में बताया। उद्घाटन समारोह को ग्राम प्रधान सुरेश आर्य, देेवेंद्र बिष्ट, कृष्णानंद शास्त्री आदि ने भी संबोधित किया। पहले दिन टैगोर के जीवन से जुड़ी चित्रकला प्रदर्शनी भी लगाई गई। बाद में राइंका और राबाइंका के छात्र-छात्राओं समेत सभी लोग टैगोर टाप तक गए और गुरुदेव की प्रतिमा के समक्ष हवन यज्ञ कर सांस्कृतिक कार्यक्रम किए।
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महोत्सव में जिला पंचायत उपाध्यक्ष पुष्कर नयाल, डा. एएस उनियाल, हेमंत डालाकोटी, डा. सुरेश डालाकोटी, ज्योर्तिमय गोस्वामी, प्रणतो बनर्जी, विजय शंकर चतुर्वेदी, प्रदीप नारायण, विनोद जोशी, मोहन चंद्र जोशी, विनीत जोशी, अखिलेश सोराड़ी समेत कई लोग मौजूद थे। संचालन डा. केके पांडे ने किया।
टैगोर टाप में लिखा था गीतांजलि का कुछ हिस्सा
रविंद्रनाथ टैगोर रामगढ़ क्षेत्र में वर्ष 1901 में आए और वर्ष 1904 तक रहे। इस दौरान उन्होंने इसी पहाड़ी में गीताजंलि की रचना की थी। वर्ष 1905 में वह यहां से चले गए थे। उनके जाने के बाद से ही लोग इस पहाड़ी को टैगोर टाप के रूप में जानते हैं।
आज के मुख्य कार्यक्रम
रविंद्रनाथ टैगोर जयंती महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को रामगढ़ में कुविवि और हर्डस की ओर से रविंद्रनाथ टैगोर के जीवन पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी की जाएगी।