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Uttarakhand News: खड़िया खनन पर लगी रोक हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने 29 पट्टाधारकों को दी राहत
Tue, 18 Nov 2025 12:39 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: हीरा मेहरा
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:39 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में खड़िया खनन पर लगी रोक हटा दी है। कोर्ट ने 29 वैध खनन पट्टाधारकों को तुरंत खनन शुरू करने की अनुमति देते हुए कहा कि हाईकोर्ट कानूनी रूप से संचालित पट्टों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बागेश्वर जिले में सोपस्टोन (खडिया) खनन पर हाईकोर्ट की ओर से लगाई गई अंतरिम रोक को गलत ठहराते हुए 29 वैध खनन पट्टाधारकों को तुरंत खनन शुरू करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट कानूनी रूप से संचालन कर रहे पट्टाधारकों पर ब्लैंकेट बैन नहीं लगा सकता।
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मामला एसएलपी (C) 23540/2025 के तहत सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था जिसमें 17 फरवरी 2025 को उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें जिले में सोपस्टोन खनन गतिविधियों पर रोक जारी रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ-जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही बता चुकी है कि सिर्फ नौ पट्टों में ही अनियमितताएं मिली थीं जबकि 29 पट्टाधारक पूरी तरह कानूनी रूप से खनन कर रहे थे।
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ऐसे में सभी पर एक समान रोक लगाना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि खनन पर पूर्ण रोक लगाने से राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन 29 पट्टाधारकों को अपने माइनिंग प्लान और पर्यावरण मंजूरी के अनुसार मशीनरी के उपयोग की भी अनुमति दी है। इन पट्टों का विवरण याचिका के वॉल्यूम 2 के पेज 352-355 में दर्ज है।
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कोर्ट ने अपने पुराने आदेश (16 सितंबर 2025) का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि वह पहले ही पट्टाधारकों को पहले से निकाले और जमा किए गए सोपस्टोन को बेचने की अनुमति दे चुका है। बशर्ते वे पूरा रिकॉर्ड दें और तय
रॉयल्टी/दंड का भुगतान करें। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मुख्य पीआईएल को जल्द निपटाने के निर्देश भी दोहराए। अब यह मामला फिर 23 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा। यह फैसला उत्तराखंड के खनन क्षेत्र के लिए बड़ा राहतभरा कदम माना जा रहा है।