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एसटीएच : विवादों का अस्पताल, इलाज पर सवाल

Wed, 22 Apr 2015 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी Updated Wed, 22 Apr 2015 01:07 AM IST
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STH : controversies hospital treatment questioned

कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसटीएच में आने वाले मरीजों के कदम ठिठक गए हैं। हाल ही में लगातार हो रही लापरवाही से मौतों ने यहां आने वाले मरीजों की संख्या घटा दी है। एक सप्ताह के भीतर ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या तीन से चार सौ तक घटी है।

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सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में पहाड़ से लेकर पड़ोसी राज्य के आसपास के जिलों के भी मरीज आते हैं। पिछले आठ महीनों में एसटीएच में एक के बाद एक घटनाएं होती रहीं और डाक्टरों की लापरवाही से मरीजों की जान जाती रही। डाक्टरों की लापरवाही को लेकर परिजनों ने कई बार हंगामा किया और एसटीएच प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया, मगर नतीजा ढाक के तीन पात रहा। पिछले मंगलवार से अब तक (एक सप्ताह के भीतर) डाक्टरों की लापरवाही से तीन लोगों की जान चली गई। एसटीएच में रोजाना 13 सौ से 15 सौ मरीज ओपीडी में आते हैं। यह संख्या अब घट रही है।
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तारीख         मरीजों की संख्या (ओपीडी में)
13-04-15    1353
14-04-15    1000
15-04-15    1250
16-04-15    1000 
17-04-15     1200
18-04-15      910
20-04-15     1390
21-04-15     1025 

एक सप्ताह के भीतर हुई लगातार हुई तीन घटनाओं से अस्पताल की छवि खराब हुई है, मामले की जांच कराई जा रही है। लापरवाही के मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अस्पताल की साख बचाने के लिए डाक्टरों और स्टाफ को मरीजों के साथ अभद्रता नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। 
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-डा. आरसी पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज

साहब गरीब हैं इलाज तो कराना ही है
रामपुर से आए नावेद खान के बड़े भाई को पेट में इंफेक्शन है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में हो रही लापरवाही की जानकारी तो मिलती है, मगर निजी अस्पतालों में इलाज कराना खासा महंगा है। मजबूरी मेें यहां लेकर आए हैं।

पिथौरागढ़ निवासी राजेश बमेठा की पत्नी की आंतों में सूजन हैं। कुछ भी खाने-पीने के बाद दर्द होने लगता है। बमेठा ने कहा कि गरीब सबसे बड़े अस्पताल में अच्छे इलाज की उम्मीद लेकर आता है, मगर डाक्टर और स्टाफ ध्यान नहीं देते हैं। रोगी और तीमारदार से अभद्रता की जाती है। कम खर्च में इलाज होने के कारण ही मरीज को लेकर आते हैं।

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