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यूपी सरकार में वन एवं कानून मंत्री रहे श्रीचंद नहीं रहे
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नैनीताल। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं यूपी सरकार में वन एवं कानून मंत्री रहे श्रीचंद का रविवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन पर विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की है। दो दिन पहले ही उनके पुत्र मुकेश का भी निधन हो गया था।
श्रीचंद (86) अविभाजित उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह सरकार में वन एवं कानून मंत्री थे। वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सहयोगी भी रहे। 1977 में वह जनता पार्टी के टिकट पर मुक्तेश्वर सीट से चुनाव जीते थे। 2001 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। 2002 और 2007 में मुक्तेश्वर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। लेकिन जीत दर्ज नहीं कर पाए। पेशे से अधिवक्ता श्रीचंद्र की छवि एक ईमानदार व स्पष्टवादी नेता की थी। दो दिन पहले ही उनके पुत्र मुकेश का भी निधन हो गया था। मुकेश कुमाऊं विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग में कार्यरत थे। पूर्व मंत्री श्रीचंद की पत्नी का कई साल पहले निधन हो गया था। वह अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए। श्रीचंद का अधिकतर जीवन नैनीताल में ही बीता। कुछ समय से वह चलने में असमर्थ थे और काफी समय से हल्द्वानी स्थित आवास विकास स्थित अपने घर में रह रहे थे। रविवार सुबह साढ़े सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि नैनीताल कचहरी के विद्वान अधिवक्ता रहे श्रीचंद अपने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में ईमानदारी और सादगी की मिसाल रहे। कहा कि मैंने उन्हें काफी करीब से जाना है। अपनी साफ सुथरी छवि से हमेशा वह लोगों में प्रसिद्ध रहे। वे पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के सहयोगी भी रहे। अनुसूचित समाज के उत्थान के लिए उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए। कोश्यारी ने श्रीचंद और उनके पुत्र के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
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उनके निधन पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, बंशीधर भगत, विधायक संजीव आर्य, पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, सरिता आर्या, मंडी समिति के सभापति मनोज साह, प्रदीप आर्य, भाजपा नेता गोपाल रावत, पूरन मेहरा, भानु पंत, हेम आर्या, पूर्व सभासद संजय साह, अधिवक्ता ज्योति प्रकाश आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की है।
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श्रीचंद (86) अविभाजित उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह सरकार में वन एवं कानून मंत्री थे। वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सहयोगी भी रहे। 1977 में वह जनता पार्टी के टिकट पर मुक्तेश्वर सीट से चुनाव जीते थे। 2001 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। 2002 और 2007 में मुक्तेश्वर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। लेकिन जीत दर्ज नहीं कर पाए। पेशे से अधिवक्ता श्रीचंद्र की छवि एक ईमानदार व स्पष्टवादी नेता की थी। दो दिन पहले ही उनके पुत्र मुकेश का भी निधन हो गया था। मुकेश कुमाऊं विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग में कार्यरत थे। पूर्व मंत्री श्रीचंद की पत्नी का कई साल पहले निधन हो गया था। वह अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए। श्रीचंद का अधिकतर जीवन नैनीताल में ही बीता। कुछ समय से वह चलने में असमर्थ थे और काफी समय से हल्द्वानी स्थित आवास विकास स्थित अपने घर में रह रहे थे। रविवार सुबह साढ़े सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
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महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि नैनीताल कचहरी के विद्वान अधिवक्ता रहे श्रीचंद अपने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में ईमानदारी और सादगी की मिसाल रहे। कहा कि मैंने उन्हें काफी करीब से जाना है। अपनी साफ सुथरी छवि से हमेशा वह लोगों में प्रसिद्ध रहे। वे पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के सहयोगी भी रहे। अनुसूचित समाज के उत्थान के लिए उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए। कोश्यारी ने श्रीचंद और उनके पुत्र के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
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उनके निधन पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, बंशीधर भगत, विधायक संजीव आर्य, पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, सरिता आर्या, मंडी समिति के सभापति मनोज साह, प्रदीप आर्य, भाजपा नेता गोपाल रावत, पूरन मेहरा, भानु पंत, हेम आर्या, पूर्व सभासद संजय साह, अधिवक्ता ज्योति प्रकाश आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की है।