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एनसीटीई के शिक्षण प्रशिक्षण के नियमों में पुनर्विचार की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो भीमताल (नैनीताल)।
Updated Sun, 08 May 2016 12:41 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भीमताल (नैनीताल)। एसओएस जेएन कौल बीएड कालेज प्रशिक्षण संस्थान में शनिवार से एनसीटीई रेगुलेशन 2014: चेलैंजस अहेड विषय पर दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुविवि के पूर्व कुलपति प्रो. वीपीएस अरोरा, मुख्य वक्ता रुहेलखंड विवि के शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो.एनएन पांडे ने दीप जलाकर किया।
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संस्थान सभागार में मुख्य वक्ता प्रो. पांडे ने एनसीटीई रेगुलेशन 2014 के लागू होने के कारणों और इसकी कमियों के बारे में बताया। अल्मोड़ा परिसर के शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. एनसी ढौंडियाल ने नियमावली को सकारात्मक रूप से लेने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि कुविवि के पूर्व कुलपति प्रो. अरोरा ने कहा कि उच्च शिक्षा में सुधार और गुणवत्ता के लिए जरूरी है कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में सुधार हो।
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संगोष्ठी के पहले दिन शिवाज कुमार पांडे, धृति तिवाड़ी, परवीन खान, प्रदीप सिंह बोरा, गजेंद्र नाथ सिंह, हेमा बिष्ट, डा. संध्या खेड़कर, अनुराग मिश्रा और पूजा प्रकाश ने शोध पत्र पेश किए। इस मौके पर बीएड कालेज की प्राचार्य डा. रंजना रूहेला, हरमन माइनर स्कूल की प्रधानाध्यापिका ललिता अरीगम, प्रो. विजया रानी ढौंडियाल, डा. संतोष अरोड़ा, डा. राजू, डा. संध्या खेड़कर, रचना चावला, एचआर कार्डिनेटर सुनीता सिंह, सोनिका, रजनी, राकेश राय, शेलेंद्र मिश्रा, रमेश, विनोद कुमार पांडे, कल्पना व गणेश चंद्र आदि मौजूद थे।
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