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कभी लगती रहीं आपत्तियां तो कभी विभागीय प्रक्रिया में अटकता रहा जमरानी प्रोजेक्ट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2022 12:51 AM IST
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Sometimes there were objections and sometimes the Jamrani project got stuck in the departmental process.
हल्द्वानी। लंबे समय से जमरानी बांध परियोजना का इंतजार लोगों को है। अभी तक लोगों की उम्मीद पर पानी ही फिरता आ रहा है। न जमरानी बांध बना और न ही आज तक प्रोजेक्ट को शुरू करने की विभागीय तेजी दिखाई गई। केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट ने साल 2022 में जब जमरानी के मुद्दे को गंभीरता से मुद्दा उठाया तब उसके बाद से रफ्तार बढ़ी और फाइल को विभागों से स्वीकृति मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। अब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत धनराशि दिए जाने की स्वीकृति के बाद जल्द जमरानी प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद फिर जाग उठी है। फरवरी 2022 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमरानी बांध परियोजना के जल्द शुरू होने की बात कही थी।
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47 साल से है इंतजार, अड़चनों का भंडार
जमरानी बांध परियोजना 2584.10 करोड़ से बनकर तैयार होनी है। 47 साल पहले इसकी योजना तैयार की गई थी। इतने साल बाद भी यह योजना धरातल पर दिखाई नहीं दी है। तमाम विभागों से स्वीकृति के बावजूद भी इस परियोजना का काम एडीबी के हाथों में पहुंचकर थम गया है। कभी बाजार में वस्तुओं के बदलते दाम तो कभी डैम की डिजाइन में कमियां बताकर एडीबी बार-बार सर्वे करती रही और मामला टलता रहा। कुछ दिन पहले भी एडीबी ने डैम के डिजाइन को राष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार करने की बात कहते हुए आपत्ति जताई थी और अंतरराष्ट्रीय मानकों को डिजाइन में शामिल करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डैम की डिजाइन रिपोर्ट थर्ड पार्टी ओपीनियन के लिए आईकोल्ड समिति के सचिव के पास भेज दी गई है। जिसकी स्वीकृति मिलने में भी समय लगेगा। आठ जून को होने वाली एडीबी अधिकारी और जल संसाधन सचिव, पेयजल सचिव समेत जमरानी प्रोजेक्ट के अधिकारियों की एक बैठक होनी थी, उसे भी स्थगित कर दिया गया है। इस बैठक में जमरानी बांध परियोजना के लिए एडीबी की ओर से जारी होने वाली धनराशि को लेकर समय सीमा निर्धारित की जानी थी। पुनर्वास को लेकर भी कई अहम फैसले लिए जाने थे।
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प्रस्ताव बनते रहे और कमियां निकलती रहीं
साल 1975 में योजना को स्वीकृति मिलने के बाद जब केंद्रीय जलायोग के पास प्रस्ताव भेजा गया उसके बाद से प्रोजेक्ट के अलग-अलग बिंदुओं को लेकर आपत्तियों का सिलसिला भी शुरू हो गया था। इस दौरान 2011 से लेकर 2018 तक कभी हाइड्रोलॉजी तो कभी बांध, विद्युत परियोजना और गेट के डिजाइन को लेकर आपत्तियां लगती रहीं। यह यहीं नहीं रुका इसके बाद बांध स्थल पर मिट्टी की गुणवत्ता तो उसके बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस जैसी कई अड़चनें लगती रहीं। कुछ साल बाद जब केंद्रीय विद्युत यांत्रिक अथॉरिटी ने 29.48 करोड़ के प्रस्ताव पर सहमति दी। हालांकि जब जनवरी 2019 में बांध परियोजना की लागत 2954.45 करोड़ की डीपीआर तैयार की गई तो उसके बाद इसे घटाकर 2584.10 करोड़ की डीपीआर स्वीकृत की गई।
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