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कोई मांग रहा चिकन-मटन तो किसी को चाहिए शाही पनीर
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शेल्टर होम में मौजूद लोग।
- फोटो : HALDWANI
हल्द्वानी। शेल्टर होम में रोके गए लोगों की मांग भी दिलचस्प है। किसी को चिकन या मटन पसंद है तो किसी को मां के हाथ की रोटी। मां के हाथ की रोटी नहीं मिलने के कारण कुछ लोगों का पेट नहीं भर रहा है। शेल्टर होम में फीड बैक फार्म में यह जानकारी दी है। हालांकि शेल्टर होम में मिल रहे खाने पर उन्होंने संतुष्टि जताई है।
22 मार्च को जनता कर्फ्यू था, उसके बाद से लॉकडाउन हो गया। 31 मार्च को ढील देने की बात हुई थी और लोग अपने-अपने घर जाने के लिए निकल पड़े थे। हालांकि 31 मार्च को ढील का निर्णय बाद में शासन ने वापस ले लिया था। फैसला वापस होने के साथ ही पुलिस प्रशासन ने पकड़कर सभी को शेल्टर होम में रख दिया था।
शेल्टर होम में लोगों से फार्म भराए गए थे। फार्म में किसी ने लिखा कि खाने में मक्खनी दाल, कढ़ाई पनीर पसंद है। तो किसी ने लिखा मां के हाथों की बनी रोटी बहुत पसंद है और उसके बिना पेट नहीं भरता है। किसी ने कहा कि अरबी या भिंडी खाने में बहुत पसंद है। कुछ लोगों ने लिखा सप्ताह में दो बार मटन या चिकन खाते हैं।
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बीडी से लेकर सौ रुपये और कैरमबोर्ड की मांग
हल्द्वानी। शेल्टर होम में रखे गए लोगों में कुछ बीड़ी मांग रहे हैं तो कुछ समय व्यतीत करने के लिए कैरमबोर्ड और लूडो की मांग कर रहे हैं। जबकि कुछ का कहना है कि हम तो सब्जी बेचने आए थे पुलिस ने पकड़कर शेल्टर होम में पहुंचा दिया।
खेतों में काम करते थे तो सौ रुपये प्रतिदिन मिलते थे। शेल्टर होम में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं अगर सौ रुपये मिल जाते तो बहुत अच्छा हो जाता। एक व्यक्ति ने अपने दिल्ली से हल्द्वानी आने का पूरा विवरण का नक्शा बना दिया। इस दौरान उसकी किससे मुलाकात हुई इसका भी जिक्र किया है। उत्तराखंड का मानचित्र बनाते हुए शेल्टर होम में क्वारंटीन होने की बात भी नक्शे के माध्यम से प्रदर्शित की है।
14 दिन पूरे होने पर जाने की मांग रहे इजाजत
लोगों को कहना है कि 14 दिन की बात कहकर शेल्टर होम में रखा था। अब 14 दिन पूरे हो चुके हैं और प्रशासन को वाहन की व्यवस्था करके हमें अपने घर भेज देना चाहिए। कोई अपने माता-पिता की बीमारी की बात कह रहा है तो कोई घर में छोटे बच्चे होने की बात कह रहा है। खास बात यह रही कि शेल्टर होम में रखे गए कुछ लोग अपना नाम नहीं बता रहे थे। फीड बैक फार्म भरने के बाद अधिकारियों को उनके नाम और पते की जानकारी मिली।
फीड बैक फार्म भरकर लोग अलग-अलग तरह के खाने की डिमांड कर रहे हैं। समय व्यतीत करते के लिए लूडो और कैरमबोर्ड खेलने के लिए मांग रहे हैं। - आरके शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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22 मार्च को जनता कर्फ्यू था, उसके बाद से लॉकडाउन हो गया। 31 मार्च को ढील देने की बात हुई थी और लोग अपने-अपने घर जाने के लिए निकल पड़े थे। हालांकि 31 मार्च को ढील का निर्णय बाद में शासन ने वापस ले लिया था। फैसला वापस होने के साथ ही पुलिस प्रशासन ने पकड़कर सभी को शेल्टर होम में रख दिया था।
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शेल्टर होम में लोगों से फार्म भराए गए थे। फार्म में किसी ने लिखा कि खाने में मक्खनी दाल, कढ़ाई पनीर पसंद है। तो किसी ने लिखा मां के हाथों की बनी रोटी बहुत पसंद है और उसके बिना पेट नहीं भरता है। किसी ने कहा कि अरबी या भिंडी खाने में बहुत पसंद है। कुछ लोगों ने लिखा सप्ताह में दो बार मटन या चिकन खाते हैं।
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बीडी से लेकर सौ रुपये और कैरमबोर्ड की मांग
हल्द्वानी। शेल्टर होम में रखे गए लोगों में कुछ बीड़ी मांग रहे हैं तो कुछ समय व्यतीत करने के लिए कैरमबोर्ड और लूडो की मांग कर रहे हैं। जबकि कुछ का कहना है कि हम तो सब्जी बेचने आए थे पुलिस ने पकड़कर शेल्टर होम में पहुंचा दिया।
खेतों में काम करते थे तो सौ रुपये प्रतिदिन मिलते थे। शेल्टर होम में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं अगर सौ रुपये मिल जाते तो बहुत अच्छा हो जाता। एक व्यक्ति ने अपने दिल्ली से हल्द्वानी आने का पूरा विवरण का नक्शा बना दिया। इस दौरान उसकी किससे मुलाकात हुई इसका भी जिक्र किया है। उत्तराखंड का मानचित्र बनाते हुए शेल्टर होम में क्वारंटीन होने की बात भी नक्शे के माध्यम से प्रदर्शित की है।
14 दिन पूरे होने पर जाने की मांग रहे इजाजत
लोगों को कहना है कि 14 दिन की बात कहकर शेल्टर होम में रखा था। अब 14 दिन पूरे हो चुके हैं और प्रशासन को वाहन की व्यवस्था करके हमें अपने घर भेज देना चाहिए। कोई अपने माता-पिता की बीमारी की बात कह रहा है तो कोई घर में छोटे बच्चे होने की बात कह रहा है। खास बात यह रही कि शेल्टर होम में रखे गए कुछ लोग अपना नाम नहीं बता रहे थे। फीड बैक फार्म भरने के बाद अधिकारियों को उनके नाम और पते की जानकारी मिली।
फीड बैक फार्म भरकर लोग अलग-अलग तरह के खाने की डिमांड कर रहे हैं। समय व्यतीत करते के लिए लूडो और कैरमबोर्ड खेलने के लिए मांग रहे हैं। - आरके शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी