Haldwani: डॉक्टरों की राह देख रहा सुशीला तिवारी अस्पताल, मरीजों को हो रही दिक्कत; घंटों इंतजार करने को मजबूर
सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के मेडिसिन विभाग में संकाय सदस्यों की कमी हो गई है। इनमें किसी चिकित्सक के अवकाश पर जाने से मरीजों की ओपीडी प्रभावित हो रही है।
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सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के मेडिसिन विभाग में संकाय सदस्यों की कमी हो गई है। इनमें किसी चिकित्सक के अवकाश पर जाने से मरीजों की ओपीडी प्रभावित हो रही है। वर्तमान में यहां दो प्रोफेसर समेत तीन ही सीनियर डॉक्टर रह गए हैं। जबकि सबसे अधिक ओपीडी मेडिसिन विभाग में ही होती है। जानकारी के अनुसार एक चिकित्सक ने नौकरी छोड़ने को लेकर नोटिस भी दिया है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में वर्तमान में दो प्रोफेसर हैं। पांच एसोसिएट प्रोफेसरों में अब यहां एक ही रह गए हैं। बीते दिनों एक अस्पताल के प्रमुख डॉ. वीके सत्यवली का देहरादून तबादला हो गया। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर के 13 पदों में यहां दो ही पद पर डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल में सबसे अधिक भीड़ मेडिसिन विभाग में ही होती है। मंगलवार को भी यहां 435 मरीजों की ओपीडी हुई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. जीएस तितियाल ने बताया कि मेडिसिन विभाग प्रमुख है, डॉक्टरों की कमी है। एक डॉक्टर ने अस्पताल छोड़ने को लेकर नोटिस दिया है।
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प्राकृतिक चिकित्सा के नाम पर एलोपैथिक दवाएं बेचने पर दो के लाइसेंस रद्द
प्राकृतिक चिकित्सा के नाम पर एलोपैथिक क्लीनिक चलाने वाले दो लोगों के लाइसेंस स्वास्थ्य विभाग ने रद्द कर दिये हैं। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गैर पंजीकृत, अवैध क्लिनिक चलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करते हुए छापेमारी अभियान चलाया था।
टीम को गौलापार और कालाढूंगी में दो ऐसे क्लीनिकों में छापेमारी के दौरान एलोपैथिक दवाएं मिली थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों ही संचालकों को नोटिस देकर जबाव मांगा था। दोनों संचालक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में टीम को प्राकृतिक चिकित्सा की आड़ में दोनों क्लिनिक एलोपैथी दवाएं बेचते मिले थे और तब दोनों पर जुर्माना भी लगाया था। एसीएमओ डॉ. श्वेता भंडारी ने बताया कि दोनों क्लिनिक संचालकों का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।