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Nainital News: जिन स्कूलों में कभी बजती थी घंटी अब उन स्कूलों में जड़ गया ताला
Wed, 28 May 2025 02:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 28 May 2025 02:07 AM IST
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भीमताल (नैनीताल)। सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने के दावे धरातल पर उतरते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। यही कारण है कि नैनीताल जिले में जिन प्राथमिक विद्यालयों में कभी घंटी की आवाज सुनाई देती थी, अब उन स्कूलों में छात्रसंख्या शून्य होने के चलते ताले लटके हैं। कई विद्यालय बंद होने के कगार पर हैं। सरकारी स्कूलों के बंद होने से शिक्षा विभाग की भी चिंता बढ़ने लगी है।
जिले में पिछले वर्ष तक 920 प्राथमिक विद्यालय थे। चार प्राथमिक विद्यालयों में छात्रसंख्या कम होने से विद्यालयों की संख्या 916 रह गई है। जिले में धारी का चौखुटा प्राथमिक विद्यालय, मुक्तेश्वर, डेलकूना और प्यूड़ा प्राथमिक स्कूल छात्रसंख्या शून्य होने के चलते बंद हो चुके हैं। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या 27956। बच्चों को पढ़ाने के लिए 1810 शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालयों में कार्यरत हैं। इसमें से 231 विद्यालय एकल शिक्षक वाले हैं। एक से 10 से छात्रसंख्या वाले विद्यालयों में 107 शिक्षक कार्यरत हैं।
बेहतर शिक्षा के लिए अभिभावक कर रहे पलायन
सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के चलते और बेहतर शिक्षा के लिए अभिभावक गांवों से पलायन कर शहर का रुख करने के लिए मजबूर हैं। इसके चलते अधिकतर गांवों में बच्चे नहीं मिल पाने के चलते भी सरकारी स्कूलों में छात्रसंख्या गिरती जा रही है। बहुत से प्राथमिक विद्यालयों में नेपाली मजदूरों के बच्चों के प्रवेश लेने से छात्रसंख्या बनी हुई है।
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पलायन होने से प्रवेश के लिए बच्चे नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते विद्यालयों में छात्रसंख्या कम हो रही है। बंद विद्यालयों में अगर बच्चे प्रवेश के लिए आएंगे तो उन्हें दोबारा खोलने का प्रयास किया जाएगा।
पुष्कर लाल टम्टा, जिला माध्यमिक शिक्षाधिकारी
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जिले में पिछले वर्ष तक 920 प्राथमिक विद्यालय थे। चार प्राथमिक विद्यालयों में छात्रसंख्या कम होने से विद्यालयों की संख्या 916 रह गई है। जिले में धारी का चौखुटा प्राथमिक विद्यालय, मुक्तेश्वर, डेलकूना और प्यूड़ा प्राथमिक स्कूल छात्रसंख्या शून्य होने के चलते बंद हो चुके हैं। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या 27956। बच्चों को पढ़ाने के लिए 1810 शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालयों में कार्यरत हैं। इसमें से 231 विद्यालय एकल शिक्षक वाले हैं। एक से 10 से छात्रसंख्या वाले विद्यालयों में 107 शिक्षक कार्यरत हैं।
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बेहतर शिक्षा के लिए अभिभावक कर रहे पलायन
सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के चलते और बेहतर शिक्षा के लिए अभिभावक गांवों से पलायन कर शहर का रुख करने के लिए मजबूर हैं। इसके चलते अधिकतर गांवों में बच्चे नहीं मिल पाने के चलते भी सरकारी स्कूलों में छात्रसंख्या गिरती जा रही है। बहुत से प्राथमिक विद्यालयों में नेपाली मजदूरों के बच्चों के प्रवेश लेने से छात्रसंख्या बनी हुई है।
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पलायन होने से प्रवेश के लिए बच्चे नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते विद्यालयों में छात्रसंख्या कम हो रही है। बंद विद्यालयों में अगर बच्चे प्रवेश के लिए आएंगे तो उन्हें दोबारा खोलने का प्रयास किया जाएगा।
पुष्कर लाल टम्टा, जिला माध्यमिक शिक्षाधिकारी