संसद में गूंजा हल्द्वानी का शुद्धिकरण मामला: खरगे बोले- हवन छुआछूत का कृत्य, नड्डा ने कहा- जांच कराएंगे
हल्द्वानी रैली के बाद शुद्धिकरण मामले पर राज्यसभा में हंगामा हुआ। खरगे ने हवन को 'छुआछूत' बताकर एफआईआर की मांग की और भाजपा पर आरोप लगाया, जबकि नड्डा ने निंदा करते हुए जांच व सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
विस्तार
आठ अगस्त को रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली का मामला संसद में उठने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक रस्साकशी और अधिक तेज हो गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की चाल बता रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है? क्या इस पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है?
यह थी विवाद की जड़
आठ अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस ने विजय शंखनाद रैली की थी। रैली के बाद सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें रैली के दौरान इस्लामिक नारों की गूंज सुनाई दी। भाजपा ने इसे लपका और कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कोतवाली में प्रदर्शन किया। जबकि कांग्रेस ने इसे एआई के तैयार किया गया वीडियो करार दिया। इसी दौरान खुद को हिंदूवादी संगठनों का बताते हुए कुछ लोगों ने रामलीला मैदान का शुद्धिकरण बताते हुए वहां हवन यज्ञ कराकर गंगाजल का छिड़काव करा दिया। यही सब विवाद का कारण बन गया।
किसने दी थी रामलीला मैदान के शुद्धिकरण की अनुमति
रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण के कार्यक्रम से भाजपा ने पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी का कहना है कि उसने ऐसा कोई कार्यक्रम किया ही नहीं। अब सवाल यह है कि शुद्धिकरण को लेकर हवन यज्ञ किसने कराया और रामलीला मैदान में गंगाजल छिड़कने वाले कौन थे और वह किस हिंदू संगठन से जुड़े थे। सवाल यह भी उठ रहा है कि इस कार्यक्रम को कराने के लिए क्या आयोजकों ने प्रशासन से पहले अनुमति ली थी या फिर बगैर अनुमति के ही आग में घी डालने का काम करा दिया गया।
खरगे के संबोधन के बाद उसी मंच का भाजपा के लोगों द्वारा शुद्धिकरण किया जाना शर्मनाक, घृणित और निंदनीय है। यह भाजपा की संकीर्ण और भेदभावपूर्ण सोच का प्रदर्शन है, जो आज भी गरीबों, दलितों, पीड़ितों से नफरत करती है। भाजपा नेताओं को यह समझना चाहिए कि यह समाज को जोड़ने का समय है, जाति और ऊंच-नीच की दीवारें खड़ी करने का नहीं।
किसी भी सार्वजनिक स्थान की पवित्रता किसी व्यक्ति की जाति, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा से निर्धारित नहीं होती। लोकतंत्र में सार्वजनिक मैदान जनता के होते हैं और वहां अलग-अलग राजनीतिक दलों की सभाएं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है। किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद उस स्थान को शुद्ध करने की कोशिश समाज में छुआछूत और ऊंच-नीच जैसी पुरानी कुरीतियों को बढ़ावा देने वाली मानसिकता को प्रदर्शित करती है। -यशपाल आर्य नेता प्रतिपक्ष
विजय शंखनाद रैली की विफलता से कांग्रेस बौखला गई है और भाजपा पर झूठे आरोप मढ़ रही है। रामलीला मैदान में भाजपा ने कोई भी ऐसा कार्यक्रम नहीं किया जिससे किसी व्यक्ति अथवा समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे। भाजपा सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है जबकि कांग्रेस वोटों का ध्रुवीकरण करने वाली पार्टी है। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। अब जो भाजपा ने किया ही नहीं है कांग्रेस जबरन उसे मुद्दा बनाने पर तुली है। जनता समझदार है और उसे सब कुछ पता है।
- सरिता आर्या विधायक नैनीताल।
रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण कार्यक्रम से भाजपा का कोई लेना देना नहीं है। कांग्रेसी नेता बेवजह इस मामले में भाजपा को बदनाम कर रहे हैं। भाजपा के खिलाफ किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- प्रताप सिंह बिष्ट, जिलाध्यक्ष भाजपा नैनीताल
भाजपा नेता झूठ बोल रहे हैं कि रामलीला मैदान का शुद्धिकरण करने वाले उनकी पार्टी के नहीं हैं और वह उन्हें नहीं जानते। गंगाजल छिड़ककर मैदान का शुद्धिकरण करने वाले भाजपा और आरएसएस से जुड़े हैं। दरअसल भाजपा दो मुंह वाली पार्टी है। जहां फायदा नजर आए वहां खुद खड़ी हो जाती है और जहां नुकसान दिखे वहां अपनों को ही मोहरा बना देती है। जो हुआ है उसे भाजपा स्वीकार करे और देश से माफी मांगे। अन्यथा कांग्रेस इस मामले में मुकदमा दर्ज कराकर दोषियों को सजा दिलाने के लिए आंदोलन करेगी। - राहुल छिम्वाल कांग्रेस जिलाध्यक्ष