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रिवर्स पलायन : घर लौटने लगे हैं पाटली तोक के लोग

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 01:02 AM IST
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Reverse migration: Patali Tok people are returning home
हल्द्वानी। नंधौर अभयारण्य क्षेत्र में स्थित पाटली तोक की तस्वीर बदलने लगी है। करीब ढाई दशकों में तोक में रहने वाले कई परिवार एक-एक कर पलायन करते चले गए। तोक में मुश्किल से दो परिवार ही बचे थे। अब तोक में पलायन कर चुके परिवारों के कदमों की आहट फिर सुनाई देनी शुरू हो गई है। दावा है कि जब से वन विभाग ने वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं, कुछ परिवार लौटे हैं।
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पाटली तोक के मोहन जोशी बताते हैं कि करीब ढाई दशक पहले तक तोक में साठ परिवार थे। यहां वन्यजीवों से खेती को लगातार नुकसान हो रहा था। हाथी घरों तक को नुकसान पहुंचा रहे थे। इसी तरह अन्य समस्याएं भी थीं। ऐसे में कई परिवार तोक को छोड़कर अमगढ़ी गांव में चले गए। पाटली तोक में केवल दो परिवार ही बचे थे। अब वन विभाग ने वन्य जीवों से सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगा दी है। इसकी जानकारी मिली तो छह परिवार लौट आए हैं। कई और परिवार भी आना चाहते हैं।
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हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि पाटली तोक (बकरियाल की पाटली) में वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए 500 मीटर सोलर फेंसिंग लगाई गई है। इससे वन्यजीवों से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायता मिली है।
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आजीविका बढ़ाने के प्रयास होंगे
हल्द्वानी। डीएफओ कुंदन कुमार कहते हैं कि संबंधित जगहों पर लोगों की आजीविका के स्रोत बढ़ाने, तोक को इको टूरिज्म आदि गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास होंगे। नंधौर अभयारण्य क्षेत्र में स्थित कठौल में भी वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), जूलोजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) संस्था के सहयोग से सोलर फेंसिंग और सोलर लाइट लगाने का काम किया गया है। अन्य प्रयास भी किए जाएंगे।

चंपावत विधायक कैलाश गहतोड़ी ने कहा कि कुछ समय पहले पाटली तोक गया था। वन विभाग के अधिकारी भी पहुंचे थे। यह एक बेहतर जगह है। यहां के लोगों की कुछ और जगहों पर भी सोलर फेंसिंग करने समेत अन्य मांगें हैं। यहां पर सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास होगा।
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