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विकास के लिए अनुसंधान और नवाचार को जरूरी : डॉ. दीपक
Sat, 22 Feb 2025 02:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 22 Feb 2025 02:07 AM IST
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भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल परिसर में कंप्यूटर विज्ञान, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रौद्योगिकी में प्रगति विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला के नेतृत्व में आईईईई उत्तर प्रदेश अनुभाग के सहयोग से सम्मेलन आयोजित हुआ। कार्यक्रम में ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में 250 से अधिक शोध पत्र प्रदर्शित किए गए।
आईईईई एजुकेशन सोसाइटी सिंगापुर के अध्यक्ष डॉ. दीपक एल. वायकर ने सम्मेलन को शिक्षा और ज्ञान का महाकुंभ बताया। उन्होंने प्रतिभागियों से बातचीत में विकास के लिए अनुसंधान और नवाचार को जरूरी बताते हुए इस मंच का लाभ उठाने का आग्रह किया। मुख्य अतिथि भारत सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग डॉ. विनीत सैनी ने भारतीय नवाचार के मामले में विश्व नेतृत्व को रेखांकित किया। साथ ही सौर फोटाबोल्टिक वास्तुकला, विकास कार्बन कैप्चर और स्मार्ट ग्रिड पहल की जानकारी दी। उन्होंने अथातो ब्रह्म जिज्ञासा का उदाहरण देते हुए प्रतिभागियों को अनुसंधान और सहयोग के माध्यम से पूर्ण सत्य प्राप्त करने का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
सम्मेलन में स्मारिका के अनावरण, समूह फोटोग्राफी और पारंपरिक रैपण कला और स्मृति चिह्न भी प्रदर्शित किए गए। युगांडा के आईएसबीएटी विवि के डॉ. मयूर कुमार छीपा ने फोटोनिक्स में प्रगति के बारे में जानकारी दी। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज कन्नौज के डीन (एकेडमिक) डॉ. अरुण कुमार सिंह ने सत्त विकास पर प्रस्तुति और एएससीपी सिंगापुर सलाहकार बोर्ड के पूर्व प्रकाशन निदेशक डॉ. सरोज डी. वाईकर ने एआई ओर बायोमेडिकल विज्ञान के एकीकरण पर विचार रखे। प्रो. वंदना रानी वर्मा ने आईईईई वुमेन इन इंजीनियरिंग (डब्ल्यूआईई) सत्र का नेतृत्व किया।
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आईईईई एजुकेशन सोसाइटी सिंगापुर के अध्यक्ष डॉ. दीपक एल. वायकर ने सम्मेलन को शिक्षा और ज्ञान का महाकुंभ बताया। उन्होंने प्रतिभागियों से बातचीत में विकास के लिए अनुसंधान और नवाचार को जरूरी बताते हुए इस मंच का लाभ उठाने का आग्रह किया। मुख्य अतिथि भारत सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग डॉ. विनीत सैनी ने भारतीय नवाचार के मामले में विश्व नेतृत्व को रेखांकित किया। साथ ही सौर फोटाबोल्टिक वास्तुकला, विकास कार्बन कैप्चर और स्मार्ट ग्रिड पहल की जानकारी दी। उन्होंने अथातो ब्रह्म जिज्ञासा का उदाहरण देते हुए प्रतिभागियों को अनुसंधान और सहयोग के माध्यम से पूर्ण सत्य प्राप्त करने का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
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सम्मेलन में स्मारिका के अनावरण, समूह फोटोग्राफी और पारंपरिक रैपण कला और स्मृति चिह्न भी प्रदर्शित किए गए। युगांडा के आईएसबीएटी विवि के डॉ. मयूर कुमार छीपा ने फोटोनिक्स में प्रगति के बारे में जानकारी दी। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज कन्नौज के डीन (एकेडमिक) डॉ. अरुण कुमार सिंह ने सत्त विकास पर प्रस्तुति और एएससीपी सिंगापुर सलाहकार बोर्ड के पूर्व प्रकाशन निदेशक डॉ. सरोज डी. वाईकर ने एआई ओर बायोमेडिकल विज्ञान के एकीकरण पर विचार रखे। प्रो. वंदना रानी वर्मा ने आईईईई वुमेन इन इंजीनियरिंग (डब्ल्यूआईई) सत्र का नेतृत्व किया।
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